राजद सांसद ने मेल, एक्सप्रेस ट्रेन में कम से कम पांच सामान्य डिब्बे जोड़ने की लोकसभा में मांग की
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक सांसद ने मंगलवार को लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से प्रत्येक मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में कम से पांच सामान्य डिब्बे जोड़ने की मांग की, ताकि गरीब लोगों को यात्रा करने में सुविधा हो।
नयी दिल्ली, भाषा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक सांसद ने मंगलवार को लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से प्रत्येक मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में कम से पांच सामान्य डिब्बे जोड़ने की मांग की, ताकि गरीब लोगों को यात्रा करने में सुविधा हो। राजद सांसद अभय सिन्हा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कई महीने पहले कहा था कि ‘‘देश में जितनी भी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें परिचालित हो रही हैं, उनमें मैं अतिरिक्त डिब्बे, चार-पांच जनरल डिब्बे जोड़ूंगा।’’
राजद सांसद ने दावा किया कि रेल मंत्री के वादे को करीब 18 महीने हो गए हैं, लेकिन एक भी मेल या एक्सप्रेस ट्रेन में जनरल डिब्बे नहीं बढ़ाये गए हैं। न्होंने कहा, ‘‘मंत्री जी ने इस संबंध में जो वादा किया था, उसके अनुसार, प्रत्येक मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में कम से कम पांच जनरल डिब्बे अनिवार्य कर दें।’’
निर्दलीय सांसद अब्दुल रशीद शेख ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित शारदा पीठ तक रेल संपर्क की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, ‘‘जब भी सरकार को उचित लगे, उस पार (पाकिस्तान) की सरकार से बात करे। उरी से आगे शारदा पीठ के मंदिर हैं, जहां कश्मीरी पंडित, श्रद्धालु जाना चाहते हैं। वहां ऐतिहासिक स्मारक हैं।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘मोदी है तो मुमकिन है’’ का नारा दिया जाता है और अगर वाकई ऐसा है तो ‘‘हम उस दिन की कल्पना करेंगे, जब (पीओके में) मुजफ्फराबाद से होकर शारदा पीठ तक रेलवे लाइन हो।’’
शेख ने यह सवाल किया कि जब देश में बाकी जगहों पर श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाये जाते हैं तो कश्मीर में ‘‘हमारी जामिया मस्जिद (नमाज के लिए) क्यों बंद है?’’ उन्होंने रेल को आम आदमी का हवाई जहाज बताते हुए कहा, ‘‘रेल दिल्ली से दूरी तो मिटा सकती है लेकिन दिल से भी दूरी मिटानी हो तो आपको जम्मू कश्मीर के लोगों के दिल जीतने होंगे। और इसके लिए जरूरी है कि आप (केंद्र) वहां के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ संवाद करें।’’
निर्दलीय सांसद ने उत्तर कश्मीर में पांच लाख सैनिकों की मौजूदगी और ट्रेनों से घर तक उनके आने-जाने का उल्लेख करते हुए रेलवे की नौकरियों में कश्मीर के लोगों के लिए एक-दो प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने का भी सरकार से आग्रह किया।
कांग्रेस के भजन लाल ने कहा कि जब रेलवे का अलग बजट पेश किया जाता था तो लोगों को बहुत उम्मीद हुआ करती थी। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान ट्रेनों में एक भी सामान्य डिब्बा नहीं बढ़ाया गया। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में एसी कोच (वातानुकूलित डिब्बों) की क्षमता में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि द्वितीय श्रेणी (स्लीपर) की क्षमता में मात्र 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गरीब लोगों को नजरअंदाज करना गलत है। यह रेल उद्योगपतियों के लिए नहीं है, बल्कि गरीबों के परिवहन का भी साधन है।’’
उन्होंने कोरोना काल के दौरान बंद की गई रेलगाड़ियों का परिचालन फिर से शुरू करने और रेलवे में तकरीबन 2.5 लाख रिक्तियों को तुरंत भरने की भी मांग की। इस बीच, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कहा कि जब रेलवे का अलग से बजट हुआ करता था, तो बजटीय आवंटन केवल 26,000 करोड़ रुपये का था, जो आज 2,81,377 करोड़ रुपये हो गया है।
तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि अमृत भारत स्टेशन के तहत आधुनिक बनाए गए रेलवे स्टेशन हवाई अड्डों की तरह दिख रहे हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश में रेल वे लाइन का शत प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा होने का भी उल्लेख किया। तेन्नेटी ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान जिन ट्रेनों का ठहराव (स्टोपेज) कई स्टेशनों पर बंद कर दिया गया, उन्हें फिर से शुरू करने की जरूरत है।
समाजवादी पार्टी के राजीव राय ने चर्चा में भाग लेते हुए यह दावा किया कि रेलवे में लोको पायलट के 11,000 पद रिक्त हैं। शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने कहा कि 2014 तक और उसके बाद की रेलवे में जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने महाराष्ट्र के सभी रेलवे स्टेशनों पर मराठी साहित्य का स्टॉल लगाये जाने की मांग की और वरिष्ठ नागरिक तथा पत्रकारों को कोरोना काल से पहले रेल किराये में मिलने वाली छूट बहाल करने का भी अनुरोध सरकार से किया।

