मप्र: कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए मंत्री विजय शाह ने फिर माफी मांगी
भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियों के विवाद से घिरे मध्यप्रदेश के काबीना मंत्री विजय शाह ने शनिवार को एक बार फिर माफी मांगी और कहा कि विवादास्पद बयान के पीछे उनका मकसद किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग के अपमान का कतई नहीं था।
इंदौर, भाषा। भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियों के विवाद से घिरे मध्यप्रदेश के काबीना मंत्री विजय शाह ने शनिवार को एक बार फिर माफी मांगी और कहा कि विवादास्पद बयान के पीछे उनका मकसद किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग के अपमान का कतई नहीं था। शाह ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा,‘‘मैंने पहले भी कई बार कहा है और आज फिर दोहरा रहा हूं कि मेरे बयान के पीछे ऐसा कोई उद्देश्य नहीं था कि इससे किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान हो।’’
उन्होंने कहा,‘‘निस्संदेह मेरे शब्द मेरी भावना के अनुरूप नहीं थे। ये शब्द देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकले थे। गलती के पीछे की भावना को अवश्य देखा जाना चाहिए। आप सब जानते हैं कि मेरी कोई दुर्भावना भी नहीं थी।" शाह ने कहा कि विवादास्पद टिप्पणी के लिए उन्होंने अंतःकरण से बार-बार क्षमा-याचना की है और वह आज एक बार फिर माफी मांग रहे हैं। उन्होंने कहा,‘‘मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि मेरी छोटी-सी त्रुटि से ऐसा विवाद उत्पन्न हुआ। मुझे विश्वास है कि मेरी भावना को सही संदर्भ में देखा जाएगा। भारतीय सेना के प्रति मेरे मन में सदैव सम्मान रहा है और हमेशा रहेगा।’’
काबीना मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में ‘शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता’ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा,‘‘इस घटना से मैंने आत्ममंथन किया है और सबक लिया है। मैं अपनी जिम्मेदारी मानता हूं। भविष्य में वाणी पर मेरा नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। एक बार पुनः मैं इस प्रकरण से आहत सभी नागरिकों, विशेषकर भारतीय सेना से अंत:करण से माफी मांगता हूं।’’ उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह कर्नल कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणियों के लिए शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करे।
शीर्ष अदालत के इन निर्देशों के बाद कांग्रेस शाह के इस्तीफे या मंत्रिमंडल से उन्हें बर्खास्त किए जाने की मांग कर रही है। पिछले साल सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित होने के बाद शाह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे। इस वीडियो में वह कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिख रहे थे। कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी मीडिया को दी थी जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गई थीं। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ ‘अपमानजनक टिप्पणी’ करने और ‘अभद्र भाषा’ का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई थी और पुलिस को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।
कड़ी आलोचनाओं का सामना करने के बाद कैबिनेट मंत्री ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि वह कर्नल कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं। शाह के पास जनजातीय कार्य विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग हैं। इंदौर जिले के रायकुण्डा गांव में शाह ने 12 मई 2025 को हलमा (सामूहिक श्रमदान और सामुदायिक सहभागिता की जनजातीय परम्परा) के सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के खुद संज्ञान लेने के बाद कैबिनेट मंत्री के खिलाफ जिले के मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का कृत्य), धारा 196 (1) (बी) (अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला ऐसा कृत्य जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती हो या भंग होने की आशंका हो) और धारा 197 (1) (सी) (किसी समुदाय के सदस्य को लेकर ऐसी बात कहना जिससे अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर विपरीत असर पड़ता हो या उनके बीच शत्रुता या घृणा या दुर्भावना पनपती हो अथवा पनपने की आशंका हो) के तहत दर्ज की गई थी।

