किस्मत में जो होगा उसे कोई मुझसे छीन नहीं सकता: गिल
टी20 विश्व कप टीम से बाहर किए जाने के बाद भारत के वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने शनिवार को कहा कि वह चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान करते हैं और जब भी मौका मिलेगा अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देने की कोशिश करेंगे।
वडोदरा, भाषा। टी20 विश्व कप टीम से बाहर किए जाने के बाद भारत के वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने शनिवार को कहा कि वह चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान करते हैं और जब भी मौका मिलेगा अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देने की कोशिश करेंगे। गिल को अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप के लिए नहीं चुना गया लेकिन 26 साल का यह खिलाड़ी खेल के दो अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में भारत का नेतृत्व करता रहेगा। गिल ने भारत के लिए 36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 869 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 28.03 और स्ट्राइक रेट 138.59 का रहा है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला के शुरूआती वनडे से पहले गिल ने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि मैं वहीं हूं जहां मुझे होना चाहिये। मेरी तकदीर में जो लिखा है उसे कोई मुझसे नहीं छीन सकता।’’ गिल ने कहा, ‘‘जाहिर है एक खिलाड़ी के तौर पर आपको यह विश्वास होता है कि अगर आप विश्व कप में खेलते हैं। तो आप अपनी टीम के लिए और अपने देश के लिए जीत हासिल करेंगे।’’ गिल ने कहा, ‘‘ मैं चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान करता हूं और टी20 टीम को मेरी शुभकामनाएं। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे हमारे लिए विश्व कप जीतेंगे।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम से बाहर किए जाने का उन पर मानसिक रूप से बुरा असर पड़ सकता है, तो गिल ने कहा कि चीजों को सरल रखना जरूरी है। भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘एक खिलाड़ी होने के नाते सब कुछ वर्तमान में जीने के बारे में है। आप जितना अधिक वर्तमान में रहेंगे जीत की उतनी संभावनाएं बढ़ जायेंगी। आप मैदान में भी अगर वर्तमान में रहते हैं तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है।” उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह देखने की कोशिश करता हूं कि मुझे अभी क्या करना है और क्या महत्वपूर्ण है। हम जितना अधिक वर्तमान में रह सकते हैं, हमारा जीवन उतना ही सरल हो जाता है।
आप अपने जीवन को सरल बनाकर अधिक शांतिपूर्ण और खुशहाल माहौल में रहना चाहेंगे।” कप्तान बनने के बाद यह गिल के लिए वनडे में सिर्फ दूसरी श्रृंखला है। गिल नवंबर में कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट के दूसरे दिन गर्दन की चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट और उसके बाद की वनडे श्रृंखला में नहीं खेले थे। उन्होंने कहा, “ चोटिल होने के कारण टीम से बाहर होना कभी आसान नहीं होता है खासकर तब जब आप नये कप्तान नियुक्त होते हैं। आपके पास बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं और जब आप बाहर बैठे होते हैं तो यह निश्चित रूप से बहुत निराशाजनक होता है।”
गिल ने इस सुझाव भी खारिज कर दिया कि अनुभवी खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व जारी रखने के लिए “आसान प्रारूप” चुना है। उन्होंने कहा, “भारतीय क्रिकेट टीम ने 2011 के बाद से कोई विश्व कप (वनडे) नहीं जीता है। अगर यह इतना आसान होता, तो हम विश्व कप के हर दूसरे आयोजन के चैंपियन होते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ “यह कहना आसान है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई भी प्रारूप आसान है। बड़े आईसीसी टूर्नामेंट जीतने के लिए बहुत धैर्य, लगातार मेहनत और मजबूत संकल्प की जरूरत होती है।”
गिल ने कहा कि उन्होंने बीसीसीआई के साथ टेस्ट श्रृंखलाओं से पहले अधिक तैयारी का समय सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से जोर दिया है। उन्होंने कहा, “एक सुझाव जिस पर मैं बहुत जोर दे रहा था, वह टेस्ट श्रृंखला से पहले अभ्यास के लिए पूरा समय मिलने का है। आप अगर पिछली दो टेस्ट श्रृंखलाओं को देखें, तो हमारे पास तैयारी के लिए उतना समय नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत में टेस्ट क्रिकेट खेलना आसान नहीं है और जब आप किसी अन्य देश के लंबे दौरे से वापस आते है तो यह और मुश्किल हो जाता है।’’ गिल ने कहा कि अगर भारत दक्षिण अफ्रीका को हराने में सफल होता तब भी उनकी इस मुद्दे पर उनकी राय यही रहती।
उनका मानना है कि टेस्ट टीम को इस सत्र की दो घरेलू श्रृंखलाओं से पहले पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है और मुझे नहीं लगता कि हमारे पास ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद या एशिया कप के बाद वेस्टइंडीज श्रृंखला खेलने से पहले पर्याप्त समय था।’’ गिल ने कहा, ‘‘कम से कम थोड़ी तैयारी होना जरूरी है, खासकर जब सफेद गेंद के प्रारूप से लाल गेंद के प्रारूप में बदलाव हो। मेरा मानना है कि हम इस पर कुछ कदम उठाएंगे और किसी भी लाल गेंद की श्रृंखला शुरू होने से पहले अच्छी तैयारी करने को ध्यान में रखेंगे।”

