सीबीआई रिश्वत मामला: एमसीडी के जूनियर इंजीनियर और दो अन्य दोषी करार

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 2024 में दर्ज किए गए रिश्वत मामले में एमसीडी के एक कनिष्ठ अभियंता सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है।

नयी दिल्ली, भाषा। दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 2024 में दर्ज किए गए रिश्वत मामले में एमसीडी के एक कनिष्ठ अभियंता सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने सुरेंद्र कुमार शर्मा, सुरेंद्र कुमार जांगरा और रमेश चंद जैन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराधों का दोषी ठहराया। जैन दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में कनिष्ठ अभियंता (जेई) के पद पर कार्यरत थे, जबकि जांगरा पूर्व सहायक थे।

शर्मा ने जैन के साथ मिलीभगत करके एमसीडी अधिकारी होने का नाटक किया था।  अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 मार्च 2024 को शर्मा ने शिकायतकर्ता अरुण कुमार गुप्ता से घर बनाने की अनुमति देने के बदले रिश्वत मांगी। उसने शिकायतकर्ता के घर को गिराने की भी धमकी दी। गुप्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने 24 दिसंबर को दिए अपने फैसले में कहा कि ‘‘पर्याप्त सबूत हैं जो यह दर्शाते हैं कि शर्मा और जांगरा ने रिश्वत मांगी थी और शर्मा रिश्वत की रकम लेते रंगे हाथों पकड़े गए। रकम उनके पास से बरामद की गई थी।’’

फैसले में यह भी कहा गया कि साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि अभियुक्तों ने "एमसीडी में जेई के रूप में कार्यरत जैन के साथ मिलीभगत और साजिश" की थी, और तीनों के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। वहीं बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए, अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान "सुसंगत और विशिष्ट" थे और वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों द्वारा विधिवत समर्थित थे। न्यायाधीश ने कहा, "अदालत को रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के पर्याप्त सबूत मिले हैं।" अदालत ने सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए पांच जनवरी की तारीख तय की है।

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