रंगीन कोरियन दुनिया के प्रति लगाव और घरेलू तनाव: गाजियाबाद की बहनों की डायरी में दर्ज दास्तां
गाजियाबाद में आत्महत्या करने वाली तीन नाबालिग बहनों के कमरे से मिली नौ पन्नों की एक छोटी-सी डायरी चीख-चीखकर उनकी खामोश तकलीफ बयां कर रही है।
गाजियाबाद (उप्र), भाषा। गाजियाबाद में आत्महत्या करने वाली तीन नाबालिग बहनों के कमरे से मिली नौ पन्नों की एक छोटी-सी डायरी चीख-चीखकर उनकी खामोश तकलीफ बयां कर रही है। रंगीन कोरियाई दुनिया के सपनों, पसंदीदा कलाकारों और कल्पनाओं में खोकर लिखे गए ये पन्ने घर के भीतर पल रहे उस तनाव और मानसिक पीड़ा की कहानी भी कहते हैं जिसने अंततः तीनों को यह भयावह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, तीन बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने मंगलवार देर रात टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस के अनुसार, डायरी के पन्नों में बार-बार कोरिया के लिए तीनों बहनों के गहरे लगाव का जिक्र है और उनमें लिखे संदेश से साफ झलकता है कि परिवार की ओर से उन्हें उनकी ख्याली दुनिया, उन पसंदों और उस पहचान को छोड़ देने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिनसे वे दिल से जुड़ी हुई थीं।
डायरी में लिखा है, ‘‘हमें कोरियन बहुत पसंद है। प्यार, प्यार, प्यार।’’ इसे ही अपनी ‘‘असल जिंदगी की कहानी’’ बताते हुए लिखा गया है कि जो कुछ इन पन्नों में दर्ज है, उस पर भरोसा किया जाए। डायरी में यह आरोप भी लगाया गया है कि माता-पिता उनकी पसंद और भविष्य के फैसलों, यहां तक कि शादी को लेकर भी उनके खिलाफ थे। एक पन्ने पर लिखा है, “आपने (माता-पिता) हमें कोरियन छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। कोरियन ही हमारी जिंदगी थी… आप हमारी शादी किसी भारतीय से करवाना चाहते थे, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो सकता।”
इसमें सजा दिए जाने का जिक्र भी किया गया है और अंत बेहद दर्दनाक शब्दों के साथ होता है। बहनों ने अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा, “आपकी मार से हमारे लिए मौत बेहतर है। इसी वजह से हम आत्महत्या कर रहे हैं… सॉरी पापा।” पुलिस उपायुक्त (ट्रांस-हिंडन) निमिष पाटिल ने कहा, “पॉकेट डायरी को कब्जे में ले लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।” उन्होंने कहा, “डायरी किन हालात में लिखी गई, इसे लेकर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।” नाम न उजागर करने की शर्त पर ‘रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन’ के एक पदाधिकारी ने बताया कि लड़कियों के पिता चेतन शेयर बाजार में भारी नुकसान होने के बाद गंभीर आर्थिक तनाव में थे।
उन्होंने बताया कि चेतन को कथित तौर पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था और एक समय बिजली का बिल चुकाने के लिए उन्हें अपना मोबाइल फोन तक बेचना पड़ा। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण घर में अक्सर झगड़े होते रहते थे। पाटिल ने कहा कि जांच के तहत पुलिस परिवार की आर्थिक स्थिति की भी पड़ताल कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद, बुधवार शाम को दिल्ली में यमुना नदी के किनारे निगम बोध घाट पर तीनों लड़कियों का अंतिम संस्कार किया गया। शालीमार गार्डन के अपर पुलिस आयुक्त अतुल कुमार सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अंतिम संस्कार से जुड़े क्रियाक्रम उनके पिता ने किए।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पता नहीं चला है कि लड़कियों का अंतिम संस्कार रात को क्यों किया गया। यह उनके निजी कारणों से हो सकता है।’’ उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि लड़कियों की मौत सिर पर चोट लगने से हुई थी। पुलिस उपायुक्त निमिश पाटिल ने कहा कि फिलहाल इसे ‘‘आत्महत्या का मामला’’ मान रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी जांच मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित रहेगी कि पिता के दावे के अनुसार क्या लड़कियां सच में ‘टास्क बेस्ड’ गेम का इस्तेमाल कर रही थीं और क्या इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की।’’ पुलिस उपायुक्त ने कहा कि अभी तक पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि लड़कियां सच में किसी कोरियन ‘टास्क-बेस्ड’ गेम का इस्तेमाल कर रही थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हम माता-पिता से गेम के बारे में पूछताछ करेंगे।’’ पुलिस उपायुक्त ने कहा कि अभी तक उन्हें आत्महत्या में किसी गेम या ऐप की भूमिका नहीं दिख रही है, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया है कि लड़कियों के पिता ने कहा है कि उनकी बेटियां इस तरह के ऐप या गेम का इस्तेमाल करती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए अभी हमारा मकसद यह पता लगाना है कि क्या सच में ऐसे किसी गेम या ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था और अगर हां, तो संबंधित विभाग से संपर्क करके उस पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की जाएगी।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या किसी विदेशी ऐप पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, अधिकारी ने कहा, ‘‘हम निश्चित रूप से देश में इस तरह के प्रतिबंध लगा सकते हैं।’’

