जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पारंपरिक ज्ञान को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ें : एनजीटी अध्यक्ष

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने शनिवार को कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच जलवायु परिवर्तन दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है।

रायपुर, भाषा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने शनिवार को कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच जलवायु परिवर्तन दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है।उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ मिलाकर सतत विकास अपनाने की जरूरत पर बल दिया।

न्यायमूर्ति श्रीवास्ताव ने दो दिवसीय 'छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2026 – "सतत तालमेल : पारंपरिक रूप से भविष्योन्मुखी"' के समापन समारोह में अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन दार्शनिक अवधारणा 'वसुधैव कुटुंबकम' इंसानों और प्रकृति के बीच तालमेल का संदेश देती है।यह शिखर सम्मेलन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया था।

न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन गया है। बढ़ते ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि, हिमनदों का पिघलना, समुद्र के जलस्तर का बढ़ना तथा पर्यावरणीय जोखिमों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। इस संकट से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी के समन्वय के साथ सतत विकास को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन दर्शन परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य का संदेश देती है। अपने समृद्ध वन क्षेत्र और आदिवासी परंपराओं के कारण छत्तीसगढ़ प्रकृति के साथ सतत सह-अस्तित्व के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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