नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए, याचिकाकर्ता नयी याचिका दायर करें: उच्चतम न्यायालय

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा सहित 12 याचिकाकर्ताओं को राजनीतिक भाषणों पर दिशा-निर्देशों को लेकर एक नयी याचिका दायर करने को कहा।

नयी दिल्ली, भाषा। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा सहित 12 याचिकाकर्ताओं को राजनीतिक भाषणों पर दिशा-निर्देशों को लेकर एक नयी याचिका दायर करने को कहा। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि नेताओं को देश में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

जिसमें भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को कथित तौर पर प्रभावित करने वाले भाषणों एवं रिपोर्टिंग के संदर्भ में नेताओं तथा मीडिया के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के कथित नफरत भरे भाषणों की पृष्ठभूमि में दायर की गई थी, जिस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जिरह की।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। इन याचिकाओं में एक वायरल वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री की आलोचना की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की ओर राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते दिखे थे।

सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के प्रारंभ में ही कहा कि माहौल ‘विषाक्त’ हो रहा है। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि वह ऐसे दिशानिर्देश तैयार करे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जब राजनीतिक भाषण से भाईचारा प्रभावित हो तो जवाबदेही तय की जा सके।हालांकि, प्रधान न्यायाधीश की इस बात से पीठ सहमत नहीं थी कि याचिका में एक विशेष राजनीतिक दल के चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाया गया प्रतीत होता है।

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प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से यह एक व्यक्ति के खिलाफ है, खासकर इस समय। इसे वापस लें। इस संबंध में एक साधारण याचिका दायर करें कि किन शर्तों पर सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं और राजनीतिक दल उनका उल्लंघन कैसे कर रहे हैं।’’

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उन्होंने कहा कि ‘‘चुनिंदा रूप से चुने गए कुछ लोगों’’ को निशाना बनाने वाली याचिका स्वीकार्य नहीं होगी और ऐसी कोई भी चुनौती वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष होनी चाहिए।प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम ऐसी याचिका पर विचार करने के इच्छुक हैं। हम किसी ऐसे व्यक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जो आकर निष्पक्षता से ऐसी याचिका दायर करे।’’

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न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए।’’ उन्होंने सभी पक्षों के संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।न्यायमूर्ति नागरत्ना ने पूछा, ‘‘मान लीजिए, हम कुछ दिशानिर्देश तय कर दें… तो उनका पालन कौन करेगा? उन्होंने कहा, ‘‘वाणी की उत्पत्ति विचार से होती है। विचारों को कैसे नियंत्रित किया जाए? हमें विचारों को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप ढालना चाहिए।’’

यह याचिका लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर रूप रेखा वर्मा और पूर्व आईएएस अधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं सहित 11 अन्य लोगों द्वारा दायर की गई थी।सिब्बल ने कहा कि हालांकि, निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) चुनावों के दौरान लागू रहती है, लेकिन एमसीसी की अवधि से पहले दिए गए भाषण इसके लागू होने के बाद भी सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहते हैं।

उन्होंने सार्वजनिक हस्तियों को सतर्क करने के लिए न्यायिक रूप से तैयार दिशा-निर्देशों का अनुरोध करते हुए सवाल उठाया, “जब एमसीसी लागू होता है तब भी डिजिटल जगत में ये भाषण दोहराए जाते हैं। ऐसे मामलों में मीडिया की क्या जिम्मेदारी है, ताकि लोकतांत्रिक वातावरण दूषित न हो?”

हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि लोकसेवक पहले से ही अखिल भारतीय सेवा नियमों सहित विभिन्न सेवा नियमों से बंधे हुए हैं। उन्होंने लापरवाही से तैयार की गई याचिकाओं के प्रति आगाह किया।न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत केवल आदेश पारित कर सकती है, जबकि उनका कार्यान्वयन एक चुनौती बना रहता है।

पूर्व के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही घृणास्पद भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी से संबंधित कई सिद्धांत प्रतिपादि किये हैं।न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी बनती है। वह पार्टी के सदस्य हैं, एक नेता हैं।’’

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