माहे रमज़ान : इबादत और जरूरतमंदों की मदद करें - मुफ़्ती गयासुद्दीन मिस्बाही
रमज़ानुल मुबारक की बरकतों और रहमतों भरा महीना हमारे दरवाज़े पर दस्तक देने वाला है।
नेशनल एक्सप्रेस, मुरादाबाद (फहीम अंसारी)। रमज़ानुल मुबारक की बरकतों और रहमतों भरा महीना हमारे दरवाज़े पर दस्तक देने वाला है। यह महीना अल्लाह तआला की एक बड़ी नेमत है,जिसमें रोज़ा, तरावीह, क़ुरआन की तिलावत, दुआ और सदक़ा का खास मक़ाम है। हमें चाहिए कि हम इस पाक महीने की शुरुआत पूरी तैयारी सच्चे इरादे और नेक नीयत के साथ करें। जामिया फारुकिया अजीजुल उलूम के प्राचार्य मुफ्ती मुहम्मद गयासुद्दीन मिस्बाही बताते हैं कि रमज़ान से पहले अपने तमाम गुनाहों से सच्ची तौबा करें।
अल्लाह तआला से दिल से माफ़ी मांगे इस बात का पक्का इरादा करें कि रमज़ान को पूरे एहतेराम और सुन्नत के मुताबिक गुज़ारेंगे, नमाज़ की पाबंदी करें और जहां संभव हो जमाअत के साथ नमाज़ अदा करें। रोज़ाना क़ुरआन मजीद की तिलावत करें और उसके अर्थ को समझने की कोशिश करें। अपने अख़लाक़ को बेहतर बनाएं झूठ, ग़ीबत, चुग़ली, झगड़े और हर तरह की बुराई से बचें।
सब्र,सच्चाई, हमदर्दी और आपसी भाईचारे को अपनाएं। गरीबों, यतीमों और ज़रूरतमंदों की मदद करें, ज़कात, सदक़ा और फ़ित्रा अदा करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इफ़्तार कराएं यह मुक़द्दस महीना अपनी ज़िंदगी को बदलने का बेहतरीन मौक़ा है। आइए हम सब मिलकर रमज़ान को इबादत, तक़वा और भलाई का महीना बनाएं।

