माहे रमज़ान जिंदगी को सुधारने का महीना : मुफ्ती आकिल नईमी

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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मुल्क भर में माहे रमज़ान की तैयारियां मुकम्मल रमज़ान अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमत और रहमतों का ख़ज़ाना है।

नेशनल एक्सप्रेस, मुरादाबाद। मुल्क भर में माहे रमज़ान की तैयारियां मुकम्मल रमज़ान अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमत और रहमतों का ख़ज़ाना है। मुफ्ती मुह़म्मद आकिल रजा मिस्बाह़ी नाजिम ए तालीमात जामिया कादरिया तालीमुल क़ुरआन भोजपुर ने बताया कि यह बहुत ही मुबारक और पाक महीना है इसी महीने में कुरआन शरीफ़ नाज़िल हुआ इसलिए रमज़ान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह क़ुरआन से ताल्लुक मज़बूत करने और जिंदगी को सुधारने का महीना है।

रोज़ा हमें सब्र सिखाता है। जब इंसान दिन भर भूखा और प्यासा रहता है, तो उसे गरीबों और ज़रूरतमंदों की तकलीफ का एहसास होता है। दिल में रह़म और हमदर्दी पैदा होती है। रमज़ान हमें बुराइयों से दूर रहने और अच्छाइयों की तरफ बढ़ने की तालीम देता है। इस महीने में नमाज़, तिलावते क़ुरआन, दुआ, ज़िक्र, सदक़ा और हर अच्छे काम का सवाब बहुत बढ़ा दिया जाता है। इसी महीने में शबे क़द्र है जो बहुत बड़ी और बरकत वाली रात है, जो हज़ार महीनों से बेहतर है।

खुशनसीब हैं वह लोग जो इस महीने की क़द्र करें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगे। रमज़ान का पैग़ाम रमज़ान को सिर्फ एक रस्म न बनाएं। बल्कि इसे अपनी जिंदगी बदलने का ज़रिया बनाएं। नमाज़ की पाबंदी करें, झूठ, ग़ीबत और लड़ाई-झगड़े से बचें, अच्छे अख़लाक अपनाएं और दूसरों की मदद करें। अगर हमने रमज़ान में खुद को सुधार लिया, तो हमारी पूरी जिंदगी बेहतर हो जाएगी।

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