भाजपा सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर सिसोदिया ने अपने अधूरे वादों की गिनाए

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार के एक साल पूरे होने के बावजूद, कई वादे पूरे नहीं हुए हैं।

नयी दिल्ली, भाषा। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार के एक साल पूरे होने के बावजूद, कई वादे पूरे नहीं हुए हैं और आबादी के विभिन्न वर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।दिल्ली सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

सरकार की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि एक साल के भीतर सब कुछ बदल जाना चाहिए था। लेकिन इस एक साल में दिल्ली की जनता से किए गए कई वादे पूरे नहीं हो पाए हैं।"

उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा पूरा नहीं किया गया है।उन्होंने कहा, "चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आश्वासन दिया था कि आठ मार्च, 2025 से दिल्ली की महिलाओं के खातों में हर महीने 2,500 रुपये जमा किए जाएंगे। एक साल बीत चुका है, लेकिन इस आश्वासन को पूरा करने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया गया है।"

प्रदूषण के मोर्चे पर, सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में इस साल समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर सबसे खराब रहा।उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता का गुस्सा बढ़ा, तो निगरानी केंद्रों को बंद करके या उन्हें अधिक हरे-भरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करके और उनके पास पानी का छिड़काव करने वाले यंत्र लगाकर एक्यूआई डेटा में हेरफेर करने के प्रयास किए गए।

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सिसोदिया ने दावा किया कि कुछ निजी स्कूलों ने फीस में 30 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि की है, और कहा, "अभिभावकों ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और शिकायत की कि फीस का भुगतान न होने के कारण छात्रों को परीक्षा देने से रोका जा रहा है। नए नियमों के दावों के बावजूद, कोई ठोस राहत प्रदान नहीं की गई।"

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सरकारी स्कूलों का जिक्र करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आम आदमी की पिछली सरकार के दौरान शुरू की गई कई पहल बंद कर दी गई हैं।उन्होंने कहा, "स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस बंद कर दिए गए हैं। हैप्पीनेस पाठ्यक्रम, उद्यमिता पाठ्यक्रम और आईआईटी-नीट कोचिंग सहायता जैसे कार्यक्रम कथित तौर पर रोक दिए गए हैं। बजट आवंटन में कटौती की गई है, जिससे बुनियादी ढांचे और नवाचार पर असर पड़ा है।"

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रोजगार के मुद्दे पर, सिसोदिया ने आरोप लगाया कि 1,000 से अधिक संविदा और अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी नौकरी खो दी है।उन्होंने कहा, "बस मार्शलों को 60 दिनों के भीतर नियमित करने के वादे पूरे नहीं किए गए; इसके बजाय, कई लोगों को बर्खास्त कर दिया गया।"

सिसोदिया ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं और परीक्षण बंद कर दिए गए हैं और नए अस्पतालों का पहले शुरू किया गया निर्माण रोक दिया गया है।नागरिक मुद्दों का हवाला देते हुए, सिसोदिया ने कचरे के जमाव, ओवरफ्लो होते सीवरों, दूषित जल आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों का जिक्र किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगभग आठ लाख लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं और विधवाओं और बुजुर्ग नागरिकों की पेंशन बंद कर दी गई है या उसमें देरी की गई है।सिसोदिया ने कहा, "नारे और नाम परिवर्तन ठोस परिणामों का विकल्प नहीं हो सकते।"

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