विपक्ष ने बेरोजगारी पर जतायी चिंता, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सरकार से सफाई देने को कहा
राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने बजट में बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं किए जाने का आरोप लगाया तथा भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष द्वारा किए जा रहे विभिन्न दावों पर सरकार से सफाई देने को कहा।
नयी दिल्ली, भाषा। राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने बजट में बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं किए जाने का आरोप लगाया तथा भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष द्वारा किए जा रहे विभिन्न दावों पर सरकार से सफाई देने को कहा। उच्च सदन में आम बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय ने प्राचीन भारत के नास्तिक दार्शनिक चार्वाक की प्रसिद्ध उक्ति ‘यावत् जीवते सुखं जीवेत, ऋणं कृत्वा घृत पीबेत (जब तक जियो सुखो से जियो, कर्ज लेकर घी पियो)’ का हवाला दिया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता कि सरकार के कई लोग इसी नीति पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी कर्ज सहित सरकार की कुल उधारी बढ़कर 2.53 लाख करोड़ रूपये हो गयी है, जो उनके ‘अमृतकाल’ का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश खोल दिया गया है जिससे राष्ट्रीय बीमा कंपनियों का व्यापार खतरे में पड़ गया है। राय ने कहा कि यह अच्छी बात है कि सरकार ने शिक्षा को उद्यम से जोड़ने के बारे में विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्णय किया है किंतु उनके अनुभव में यह बात आयी है कि ऐसे मामलों में समिति या आयोग का नतीजा सिफर ही निकलता है। उन्होंने पूर्व बजट में की गयी कई घोषणाओं को पूरा होने में हो रहे विलंब पर चिंता जतायी।
तृणमूल सदस्य राय जब चर्चा में भाग ले रहे थे तो उन्होंने अपनी पार्टी से संबंधित पटका पहन रखा था, जिस पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आपत्ति व्यक्त की। उपसभापति हरिवंश के निर्देश पर राय ने इसे हटा दिया। उन्होंने देश में आर्थिक असमानता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के दस शीर्ष धनी लोग 51 प्रतिशत संपदा पर नियंत्रण रख रहे हैं। तृणमूल सांसद ने कहा कि भारत अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में ढोल पीटा जा रहा है जबकि उसके पूरे विवरण अभी सामने नहीं आये हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी दावे कर रहे हैं कि भारत रूस से तेल आयात बंद कर देगा तथा अमेरिका एवं वेनेजुएला से तेल लेगा।
उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि यदि ऐसा होता है तो लागत में कितनी वृद्धि होगी? उन्होंने कहा कि अमेरिका का कहना है कि उसके लिए भारत के डेयरी एवं कृषि बाजार खोले जाएंगे तथा संकेत दिया है कि भारतीय किसानों को दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी बंद की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो भारत के कृषि क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। राय ने कहा कि पिछले साल अमेरिका द्वारा भारत से किए जाने वाले निर्यात पर मात्र 3.5 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगता था किंतु अब यह दर बढ़कर 18 प्रतिशत हो गयी है, ऐसे में भारत को कहां लाभ मिला?
तृणमूल सांसद ने कहा, ‘‘हमने अपने सदाबहार मित्र रूस का साथ छोड़कर अमेरिका का हाथ पकड़ा है जो कभी हमारे साथ नहीं खड़ा हुआ और वह पाकिस्तान जैसे उपद्रवी देश का साथ देता है। यह हमारे राष्ट्रीय हितों के पूरी तरह से विपरीत है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को भारत अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए? चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने कहा कि यह बजट आंकड़ों की रोशनी से भरा हुआ है किंतु यह आम आदमी की जिंदगी में किसी तरह रोशनी नहीं ला पाता है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले नौ साल से जो बजट पेश किए जा रहे हैं उनमें यह सबसे नीरस बजट है।
उन्होंने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार 2300 अंक लुढ़क गया जिससे पता चलता है कि यह बजट कैसा है। उन्होंने कहा कि यह बजट न निवेशकों, न बाजार और न ही आम आदमी की उम्मीदों पर खरा उतर पाया है। डांगी ने कहा कि बजट में सरकार 20 साल बाद की बात कर रही है यानी आज की जो समस्याएं हैं, उनका समाधान 20 साल बाद मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट युवा बनाम वादे साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का जो वादा किया गया है वह यदि पूरा नहीं हो पाया तो रोजगार के नये अवसर पैदा करने के वादे पर कौन भरोसा करेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती ठप है तथा ठेके एवं अस्थायी तौर पर भर्तियां की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल भाषण देता है। चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक की कानिमोझी एनवीएम सोमू ने कहा कि यह वित्त मंत्री द्वारा लाया गया एक और विफल बजट है। उन्होंने कहा कि लगातार नौ बार निरंतरता बनाये रखने के लिए वित्त मंत्री की सराहना करनी चाहिए किंतु यह निरंतरता नौ वर्ष की विफलता की है जो उनके स्वयं, उनकी पार्टी और नागपुर के लिए अच्छी हो सकती है पर देश के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले बजटों में तमिल काव्य रचना ‘तिरुक्कुरल’ के अंशों का उल्लेख तो किया जाता था जिससे उनके राज्य के लोगों को कम से कम यह लगता था कि भले ही उनके राज्य को बजट में कुछ न मिला हो किंतु उनकी भाषा को तो बजट में स्थान दिया गया।
उन्होंने कहा कि किंतु इस बार बजट में वह सांकेतिक स्वीकारोक्ति भी नहीं की गयी है। द्रमुक सदस्य ने कहा कि यह बजट गरीब विरोधी है और देश की आर्थिक सच्चाइयों से बेपरवाह है। उन्होंने कहा कि यह बजट चेहरा विहीन, आधार विहीन और लक्ष्य विहीन है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, कामगारों, वेतनभोगी मध्यम वर्ग या बेरोजगारों को कोई राहत नहीं प्रदान कर रहा है जबकि यह बड़े व्यापारिक समूहों के हितों को लगातार प्राथमिकता दे रहा है।

