उच्चतम न्यायालय ने एनबीसीसी को सुपरटेक की 16 परियोजनाएं शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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एक दशक से अधिक समय से अपने सपनों के घर की बाट जोह रहे हजारों खरीदारों को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) के उस आदेश को बृहस्पतिवार को बरकरार रखा।

नयी दिल्ली, भाषा। एक दशक से अधिक समय से अपने सपनों के घर की बाट जोह रहे हजारों खरीदारों को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) के उस आदेश को बृहस्पतिवार को बरकरार रखा, जिसमें सरकारी स्वामित्व वाली एनबीसीसी को कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की 16 आवासीय परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने सभी अधिकरणों और उच्च न्यायालयों को यह आदेश दिया है कि वे ऐसा कोई भी आदेश न दें जिससे एनबीसीसी कंपनी द्वारा किए जा रहे निर्माण काम रुक जाएं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का प्रयोग करते हुए एनसीएलएटी के 12 दिसंबर, 2024 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एनबीसीसी को घर खरीदारों के हित में परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा कि कई घर खरीदारों के अनुसार, सुपरटेक ने 2010-12 के दौरान लगभग 51,000 घरों की बुकिंग की थी।

प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी के वित्तीय और परिचालन लेनदारों के ब्याज और बकाया का निपटारा तब ही किया जा सकता है जब घर खरीदारों को पूरी तरह से तैयार मकान सौंप दिए जाएं। पीठ ने यह भी कहा कि मकानों में पानी, बिजली, सीवेज कनेक्शन जैसी सभी सुनिश्चित सुविधाएं होनी चाहिए, साथ ही आस-पास सड़कें और पार्क भी होने चाहिए। सुपरटेक के वित्तीय और परिचालन लेनदारों को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) और एनसीएलएटी द्वारा न्यायसंगत पाए गए नुकसान को स्वीकार करना होगा।

पीठ ने निर्देश दिया कि एनबीसीसी परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा करे और एनसीएलएटी द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति उसे आवश्यक सहयोग प्रदान करे। पीठ ने कहा कि यदि परियोजनाओं में कोई बाधा आती है, तो संबंधित पक्ष उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने 21 फरवरी 2025 को सुपरटेक की 16 आवासीय परियोजनाओं को लगभग 9,500 करोड़ रुपये की लागत पर पूरा करने के लिए एनबीसीसी को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त करने के आदेश पर रोक लगाई थी।

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