केरल के लिए एलडीएफ और यूडीएफ का बारी-बारी से शासन बेहतर है: कवि के. सच्चिदानंदन

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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केरल साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और कवि के. सच्चिदानंदन ने सोमवार को यहां कहा कि बारी-बारी से राज्य पर शासन करने वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ही केरल के लिए बेहतर हैं।

त्रिशूर (केरल), भाषा। केरल साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और कवि के. सच्चिदानंदन ने सोमवार को यहां कहा कि बारी-बारी से राज्य पर शासन करने वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ही केरल के लिए बेहतर हैं।कम्युनिस्ट विचारधारा के पक्षधर सच्चिदानंदन एक साक्षात्कार के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने लगातार एक ही मोर्चे द्वारा राज्य पर शासन करने के खतरों के बारे में बात की।

सच्चिदानंदन ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में नहीं थी और उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इसी रुख पर कायम हैं।उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष और सत्ताधारी मोर्चे का बारी-बारी से सत्ता में आना लोकतंत्र का एक बुनियादी सिद्धांत है।’’उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के अनुभव के आधार पर वैकल्पिक सरकार की आवश्यकता है।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे प्रत्यक्ष रूप से पता है कि वहां क्या हुआ था और मैंने वहां के कम्युनिस्ट नेताओं से भी बात की है।

जब शासन में निरंतरता रहती है तो आशंका रहती है कि पार्टी के लिए अवांछनीय व्यक्ति गुप्त उद्देश्यों से पार्टी में शामिल हो जाएं। इससे सत्ता का विकेंद्रीकरण भी कम हो जाता है।’’उन्होंने कहा कि विपक्ष में बैठने से पार्टी खुद को मजबूत करती है, जनता के बीच अपनी जड़ें गहरी करती है और उनकी चिंताओं को सुनने में मदद मिलती है।सच्चिदानंदन ने कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष का होना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘ चुनाव में हार जीत राजनीतिक दलों का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि क्या राजनीतिक दल लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं या नहीं।’’सच्चिदानंदन ने कहा कि उन्हें पहले लगता था कि एक हथियारबंद क्रांति भारत की विविधता के बावजूद लोगों को एकजुट कर सकती है।उन्होंने कहा, "लेकिन मैंने खुद को उस सोच से दूर कर लिया है और महसूस किया है कि यह मुमकिन नहीं है।

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इसलिए, आखिरी मकसद लोकतंत्र को असली लोकतंत्र बनाना है।"उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी विशेष पार्टी के खिलाफ निर्देशित नहीं थीं।उन्होंने कहा, ‘‘अगर राज्य में लगातार कांग्रेस का शासन होता, तो भी मैं यही कहता।’’केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निरंतर शासन के संबंध में सच्चिदानंदन ने कहा कि उन्होंने सीताराम येचुरी का समर्थन किया था,

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जिन्होंने इंडिया गठबंधन की अवधारणा को आगे बढ़ाया था।उन्होंने कहा, "फासीवाद के हर शोध से पता चलता है कि विपक्षी पार्टियों को एक साथ खड़े होना चाहिए, भले ही उनके मकसद अलग-अलग हों। लेकिन केरल में, मैं ऐसा नहीं कहूंगा क्योंकि इससे भाजपा के लिए मुख्य विपक्ष बनने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो बाद में उसे सत्तामें आने में मदद कर सकता है।"

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