दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में आयोजित हुआ भव्य हिंदू सम्मेलन, शामिल हुए हजारों सनातनी
दिल्ली में इन दिनों हिंदू समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हेतु 2000 से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
नेशनल एक्स्प्रेस, नई दिल्ली। दिल्ली में इन दिनों हिंदू समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हेतु 2000 से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 1 फरवरी 2026 को ग्रेटर कैलाश पार्ट–2 स्थित सनातन धर्म मंदिर में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की। इस कार्यक्रम का आयोजन ग्रेटर कैलाश क्षेत्र और अलकनंदा अपार्टमेंट्स के स्थानीय नागरिकों द्वारा किया गया।
इस सम्मेलन का मूल उद्देश्य यह संदेश देना था कि हिंदू समाज ही समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है, और इसके लिए “पंच परिवर्तन” को व्यवहार में उतारना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के सचिव श्री पुष्कर सिन्हा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पंच परिवर्तन केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का व्यावहारिक मार्ग है, जिसे प्रत्येक हिंदू को अपने दैनिक जीवन में अपनाना होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10:30 बजे शिव पंचाक्षर स्तोत्र से हुई। इसके पश्चात सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने हिंदुत्व विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है और हमें अपनी ज्ञान परंपरा को समझते हुए झूठे नैरेटिव से बाहर निकलना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “जो जीता वही सिकंदर” जैसे वाक्य भारतीय इतिहास और चेतना के विपरीत हैं, क्योंकि भारत में विजेता चंद्रगुप्त मौर्य थे, न कि सिकंदर।
इसी प्रकार कुछ प्रचलित कहावतों और धारणाओं पर पुनर्विचार करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने शब्दों और विचारों को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित के अनुरूप ढालना होगा।इसके बाद ताल वाद्य समुच्चय (परकशन एन्सेम्बल) तथा कलारीपयट्टू जैसे शारीरिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनों ने विशेष रूप से युवाओं का उत्साह बढ़ाया। बड़ी संख्या में युवाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग प्रदर्शन और मार्शल आर्ट प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
पर्यावरण संरक्षण विषय पर आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में श्री पीपल बाबा, श्री अश्वनी खुराना एवं डॉ. राज मिश्रा ने अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन श्री पुष्कर सिन्हा द्वारा किया गया। वक्ताओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक दायित्वों पर बल दिया और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र सह सेवा प्रमुख श्री मिथलेश जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि संघ ने स्थापना काल से ही सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी है। कोरोना काल में करोड़ों स्वयंसेवकों द्वारा किया गया सेवा कार्य हिंदू समाज की एकता और संवेदनशीलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण, महाकुंभ में 65 करोड़ हिंदुओं की सहभागिता और विभिन्न सेवा अभियानों से यह सिद्ध होता है कि यदि हिंदू समाज संगठित होकर कार्य करे तो भारत की प्रगति को कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भटकाने वाले तत्वों से सावधान रहें और पंच परिवर्तन के विषयों को अपने जीवन में आत्मसात करें।कार्यक्रम में कुटुंब प्रबोधन, संघ के 100 वर्ष, तथा पंच परिवर्तन पर आधारित कथक, भरतनाट्यम, लोक नृत्य, मोहिनीअट्टम और योग प्रदर्शनों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।इस अवसर पर गुरुदेव श्री अनीश, डॉ. गिरधर प्रसाद भगत, श्री संजीव जी (दक्षिणी विभाग कार्यवाह), अजय उपाध्याय (जिला कार्यवाह, कालकाजी) सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की आयोजन समिति में अध्यक्ष श्री रजनीश गोयनका, सचिव श्री पुष्कर सिन्हा, कोषाध्यक्ष डॉ. हमेंद्र मित्तल, पूजा तिवारी सहित अन्य कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सम्मिलित रहे। कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन श्री विवेक दीक्षित द्वारा किया गया।सम्मेलन का समापन प्रसाद (भंडारा) के साथ हुआ और सभी सहभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

