मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया तो समर्थन करूंगी: ममता

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
On

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से समर्थन मांगा। बनर्जी अपने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में हैं।

नयी दिल्ली, भाषा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से समर्थन मांगा। बनर्जी अपने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में हैं। एक दिन पहले, बनर्जी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ एसआईआर मुद्दे पर कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ हुई बैठक को बीच में छोड़कर बाहर निकल गई थीं और आरोप लगाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अहंकार दिखाया और उन्हें अपमानित किया।

राष्ट्रीय राजधानी में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, ममता बनर्जी ने दावा किया कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, वे उनकी पार्टी के समर्थक हैं। बनर्जी के साथ एसआईआर से कथित रूप से प्रभावित पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को जवाबदेह ठहराने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से कानून लाने के विचार का तृणमूल कांग्रेस समर्थन करती है या नहीं, इस सवाल पर बनर्जी ने कहा, ‘‘हम भी चाहते हैं कि उन्हें (मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को) पद से हटाया जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास पर्याप्त आंकड़े (सांसद) नहीं हैं, लेकिन एक प्रावधान है। इसे दर्ज किया जाएगा। अगर वे (कांग्रेस) ऐसा कुछ करते हैं, तो हम भी अपने पार्टी सांसदों से इस पर चर्चा करेंगे। जब जनहित की बात आती है, तो हम मिलकर काम करते हैं।’’ बनर्जी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी आगामी राज्य चुनावों में अकेले चुनाव लड़ेगी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निर्वाचन आयोग का "इस्तेमाल" करने के बजाय चुनाव में उनका सामना करने की चुनौती दी।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हटाए जा रहे नामों में अधिकतर तृणमूल समर्थकों के नाम हैं। उन्होंने कहा, ‘‘शत-प्रतिशत नाम तृणमूल कांग्रेस के (लोगों के) हैं... एक-दो नाम शायद साख बचाने के लिए अन्य पार्टियों के हैं...’’ मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एसआईआर से प्रभावित होने वाले ज्यादातर दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और अन्य हाशिए पर रहने वाले समूह हैं। उन्होंने कहा, "मेरे राज्य में 23 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 6 प्रतिशत आदिवासी और 33 प्रतिशत मुस्लिम हैं, क्या मैं कहूं कि आप मेरे राज्य से बाहर चले जाएं?"

Read More जम्मू: फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले के विरोध में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विरोध मार्च निकाला

बनर्जी ने कहा, "हम कहां जा रहे हैं? क्या हम बंगाल में...या पूरे भारत में महा आपातकाल शुरू करने जा रहे हैं? सिर्फ बंगाल पर उनका नियंत्रण नहीं है। विभिन्न जिलों के सभी नेता बंगाल में हैं, सभी एजेंसियां ​​बंगाल में बैठी हैं।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘वे उद्योग जगत से लेकर व्यापारियों, नेताओं और आम लोगों तक, सभी को परेशान कर रहे हैं...लेकिन कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि लोकतंत्र में कुर्सियां स्थायी नहीं होतीं, बल्कि लोग स्थायी होते हैं।" उन्होंने दावा किया कि भाजपा बंगाल में सत्ता में नहीं आएगी क्योंकि लोग उससे नफरत करते हैं। बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भाजपा के मतदाता हमें ही वोट देंगे।’’ बनर्जी ने आरोप लगाया, "मेरे निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने एकतरफा तौर पर 40,000 मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। 

Read More एलपीजी संकट: उत्तराखंड सरकार व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही

निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।" सोमवार की बैठक के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ एक बार फिर तीखा हमला करते हुए बनर्जी ने कहा, "हम जो भी पूछते, वह कभी जवाब नहीं देते, वह हमें धमकाते रहे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें विनम्रता की उम्मीद थी, हम बहुत विनम्र हैं, हम फूल और मिठाई भी लेकर गए थे। हमने उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने हमारे साथ व्यवहार किया, हमने उनका बहिष्कार किया।’’ जब उनसे निर्वाचन आयोग के इस आरोप के बारे में पूछा गया कि बनर्जी "आक्रोशित" थीं और "नाराज होकर चली गईं", तो उन्होंने कहा, "निर्वाचन आयोग के बयान पर भरोसा न करें। निर्वाचन आयोग केवल अपनी साख बचाने के लिए ऐसा कह रहा।’’

Read More पश्चिम एशिया की स्थिति और रसोई गैस संकट पर संसद में चर्चा हो, प्रधानमंत्री जवाब दें: खरगे

उन्होंने कहा, "कल जो हुआ उसके बाद, हम निर्वाचन आयोग से सम्मान की उम्मीद नहीं करते। वे भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरह काम करते हैं।" संवाददाता सम्मेलन में उनके साथ मौजूद एसआईआर प्रक्रिया के "पीड़ितों" का जिक्र करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि वे उन कई अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें इस प्रक्रिया के कारण नुकसान उठाना पड़ा। बनर्जी ने कहा, ‘‘हमारे पीछे बैठे सभी लोग एसआईआर के पीड़ित हैं। मैं यहां लाखों लोगों को ला सकती थी।’’

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने आरोप लगाया, "वे एसआईआर पीड़ितों को अपना बचाव करने का मौका नहीं दे रहे हैं।" एसआईआर के समय पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह प्रक्रिया केवल विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में ही क्यों की जा रही है, भाजपा शासित असम में क्यों नहीं, जहां चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा, "चुनाव वाले चार राज्यों में से तीन राज्यों में वे एसआईआर कर रहे हैं, लेकिन भाजपा शासित असम में नहीं।"

बनर्जी ने पूछा, "चुनाव से ठीक पहले एसआईआर क्यों किया जा रहा है? क्या बिना किसी योजना के इसे 2-3 महीनों के भीतर करना संभव है?" टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "एक निर्वाचित मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग को छह पत्र लिखे हैं। किसी का भी जवाब नहीं दिया गया और न ही पत्र पर कोई प्रतिक्रिया मिली। तो फिर बदसलूकी कौन कर रहा है?"

संबंधित समाचार