अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में ‘वीआईपी' की भूमिका की जांच करेगी सीबीआई
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक रिसॉर्ट की 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या में एक ‘वीआईपी’ की कथित भूमिका की जांच के लिए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
नयी दिल्ली, भाषा। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक रिसॉर्ट की 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या में एक ‘वीआईपी’ की कथित भूमिका की जांच के लिए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अंकिता का शव 2022 में ऋषिकेश के पास पाया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। यह मांग तब की गई जब एक अभिनेत्री, जिसने खुद को एक विधायक की पत्नी बताया था, ने ऑडियो और वीडियो क्लिप प्रसारित किए थे, जिनमें कथित तौर पर हत्या में एक अति विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) की संलिप्तता का संकेत दिया गया था।
सीबीआई ने राज्य पुलिस की प्राथमिकी को अपने अधिकार में ले लिया है, जो जाने-माने पर्यावरणविद् और पद्म श्री अनिल जोशी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, ताकि ‘वीआईपी’ की कथित भूमिका की जांच की जा सके। उत्तराखंड के पौड़ी स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता की हत्या रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों ने की थी, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सोशल मीडिया पर ऑडियो, वीडियो और अन्य सामग्री प्रसारित हो रही हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ अज्ञात व्यक्ति, जिन्हें 'वीआईपी' कहा जा रहा है, अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित अपराध में शामिल थे।
‘पीटीआई-भाषा’ को प्राप्त प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘हत्या में शामिल दोषियों को सजा सुनाए जाने के बावजूद, सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मामले से जुड़े कुछ सबूत छिपाए गए या नष्ट कर दिए गए।’’ स्थापित प्रक्रिया के अनुसार, सीबीआई किसी राज्य सरकार के अनुरोध पर राज्य पुलिस की प्राथमिकी को अपने मामले के रूप में पुनः दर्ज करती है, जो जांच का प्रारंभिक बिंदु बन जाता है। एजेंसी का निष्कर्ष आरोपपत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों से मेल खा भी सकता है और नहीं भी। अंकिता के माता-पिता ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई जांच की मांग की थी।

