इंदौर पेयजल त्रासदी : न्यायिक जांच आयोग ने सबूत और दस्तावेज जमा करने की मियाद बढ़ाई
इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने इस मामले से जुड़े सबूत, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री उसके कार्यालय में जमा कराए जाने की समयसीमा में महीने भर की वृद्धि करते हुए एक अप्रैल की अंतिम तिथि तय की है।
इंदौर (मध्यप्रदेश), भाषा। इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने इस मामले से जुड़े सबूत, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री उसके कार्यालय में जमा कराए जाने की समयसीमा में महीने भर की वृद्धि करते हुए एक अप्रैल की अंतिम तिथि तय की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले कहा था कि पेयजल त्रासदी से जुड़े सबूत, दस्ता वेज और अन्य संबंधित सामग्री उसके कार्यालय में किसी भी व्यक्ति द्वारा 28 फरवरी तक पेश की जा सकती है।
उन्होंने बताया, ‘‘कई नागरिकों, पीड़ित परिवारों और संस्थाओं द्वारा समयसीमा में विस्तार का अनुरोध किए जाने तथा अधिक से अधिक तथ्यात्मक सामग्री जमा करने के उद्देश्य से आयोग ने यह अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं एक अप्रैल तक अपनी आपत्तियां, अभ्यावेदन, दस्तावेज अथवा सबूत आयोग के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।’’
अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल दूषित होने के कारणों, दूषित पेयजल से हुई जन हानि व लोगों पर पड़े चिकित्सीय प्रभावों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और सुधारात्मक उपायों के बारे में जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में पेयजल दूषित होने से संबंधित शिकायतें, मरीजों के चिकित्सीय दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण पत्र, पेयजल पाइपलाइन में रिसाव और इसमें सीवरेज मिलने से संबंधित फोटो व विडियो, जलापूर्ति से जुड़े कामों की निविदाओं के दस्तावेज, कार्य आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट भी आयोग के सामने पेश की जा सकती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप पिछले साल दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने इस प्रकोप में कुल 36 लोगों की मौत का दावा किया है। बहरहाल, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने इस मामले से जुड़े सबूत, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री उसके कार्यालय में जमा कराए जाने की समयसीमा में महीने भर की वृद्धि करते हुए एक अप्रैल की अंतिम तिथि तय की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले कहा था कि पेयजल त्रासदी से जुड़े सबूत, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री उसके कार्यालय में किसी भी व्यक्ति द्वारा 28 फरवरी तक पेश की जा सकती है।
उन्होंने बताया, ‘‘कई नागरिकों, पीड़ित परिवारों और संस्थाओं द्वारा समयसीमा में विस्तार का अनुरोध किए जाने तथा अधिक से अधिक तथ्यात्मक सामग्री जमा करने के उद्देश्य से आयोग ने यह अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं एक अप्रैल तक अपनी आपत्तियां, अभ्यावेदन, दस्तावेज अथवा सबूत आयोग के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।’’
अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल दूषित होने के कारणों, दूषित पेयजल से हुई जन हानि व लोगों पर पड़े चिकित्सीय प्रभावों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और सुधारात्मक उपायों के बारे में जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में पेयजल दूषित होने से संबंधित शिकायतें, मरीजों के चिकित्सीय दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण पत्र, पेयजल पाइपलाइन में रिसाव और इसमें सीवरेज मिलने से संबंधित फोटो व विडियो, जलापूर्ति से जुड़े कामों की निविदाओं के दस्तावेज, कार्य आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट भी आयोग के सामने पेश की जा सकती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप पिछले साल दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने इस प्रकोप में कुल 36 लोगों की मौत का दावा किया है। बहरहाल, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।

