ताकत के दम पर किसी देश के नेतृत्व को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के खिलाफ: महमूद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि ताकत के बल पर किसी देश की नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के विरुद्ध है।
नयी दिल्ली, भाषा। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि ताकत के बल पर किसी देश की नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के विरुद्ध है। संगठन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, राज्यसभा के पूर्व सदस्य ने ईरान की ओर से क्षेत्र के अन्य देशों में किए जा रहे हमलों पर भी चिंता व्यक्त की।
तत्काल युद्धविराम और बातचीत के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को वक्त की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हर उस कदम का विरोध करती है जो दुनिया को अमानवीय युद्ध और अस्थिरताकी ओर धकेलता हो। उन्होंने पश्चिम एशिया की अत्यंत विस्फोटक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा, “अमेरिका और इज़राइल की आक्रामक तथा उकसाने वाली कार्रवाइयों ने न केवल क्षेत्रीय शांति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी खतरे में डाल दिया है।”
मदनी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान हत्या और रक्तपात से नहीं हो सकता व शक्ति के बल पर अपनी बात मनवाने की कोशिशें केवल घृणा, प्रतिशोध और मानवीय त्रासदियों को जन्म देती हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे तत्काल युद्धविराम, तनाव में कमी और सार्थक कूटनीतिक वार्ता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएं, ताकि क्षेत्र को और अधिक विनाश से बचाया जा सके।
मौलाना ने चेतावनी दी कि यदि विश्व शक्तियों ने समय रहते अक्लमंदी, इंसाफ और कूटनीतिक संतुलन का परिचय नहीं दिया, तो इसके दुष्परिणाम किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे। मदनी ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई तथा उनके परिजनों और सहयोगियों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि किसी देश की नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और समझौतों के विरुद्ध है और दुनिया को बर्बरता की ओर धकेलने के समान है।

