न्यायालय ने आदेश में संशोधन किया, अनुराग बीसीसीआई की गतिविधियों में भाग लेने के लिये स्वतंत्र
बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने जनवरी 2017 के आदेश में संशोधन किया और कहा कि वह नियमों और विनियमों के अनुसार क्रिकेट बोर्ड के मामलों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।
नयी दिल्ली, भाषा। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने जनवरी 2017 के आदेश में संशोधन किया और कहा कि वह नियमों और विनियमों के अनुसार क्रिकेट बोर्ड के मामलों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। उच्चतम न्यायालय ने जनवरी 2017 में ठाकुर को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मामलों से जुड़े रहना “तुरंत बंद करने और उससे दूर रहने” का निर्देश दिया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करते हुए बृहस्पतिवार को जनवरी 2017 के आदेश में संशोधन किया। न्यायालय ने इस बात पर विचार किया कि ठाकुर ने तब उसके समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी। उच्चतम न्यायालय ने दो जनवरी, 2017 को ठाकुर के खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू की थी,
क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष शशांक मनोहर को पत्र लिखने के संबंध में एक झूठा हलफनामा दाखिल किया था। शीर्ष अदालत ने 14 जुलाई, 2017 को ठाकुर को राहत देते हुए उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही को रद्द कर दिया। इससे पहले ठाकुर ने व्यक्तिगत रूप से न्यायालय से बिना शर्त और स्पष्ट माफी मांगी।

