चुनाव से पहले अधिकारियों को हटाना भाजपा की महिला-विरोधी और बंगाल-विरोधी सोच को दिखाता है: ममता
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के ठीक बाद राज्य के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए।
कोलकाता, भाषा। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के ठीक बाद राज्य के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा को "महिला विरोधी और बंगाल विरोधी" करार दिया।राज्य में एलपीजी संकट के विरोध में निकाले गए मार्च के बाद मध्य कोलकाता के डोरिना क्रॉसिंग पर एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि भगवा खेमा जितने चाहे उतने अधिकारियों को बदल सकता है, लेकिन वे सरकार को नहीं बदल पाएंगे।
बनर्जी ने निर्वाचन आयोग का जिक्र किये बिना कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप बदले में किन अधिकारियों को नियुक्त करते हैं; वे सभी बंगाल के लिए काम करेंगे।’’बनर्जी ने कहा, "उन्होंने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना, मुख्य सचिव और बंगाली महिला नंदिनी चक्रवर्ती को हटाने के लिए आधी रात का समय चुना। इससे पता चलता है कि वे कितने महिला विरोधी हैं।"
मुख्यमंत्री ने राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटाए जाने के लिए भी निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा।तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "हमारे गृह सचिव गैर-बंगाली हैं। उनका हटाया जाना बंगाल के कुशल अधिकारियों के प्रति उनके गहरे तिरस्कार को दर्शाता है।"उन्होंने कहा, “बंगाल को अपनी जमींदारी मत समझिए। आप जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और प्रभारी निरीक्षकों को धमकाकर बदल सकते हैं, लेकिन लोगों को नहीं बदल सकते। याद रखिए, आपने उन्हें नौकरी नहीं दी, उन्होंने अपनी योग्यता के बल पर यह पद हासिल किया है।
आपको उनका अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है।”पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर राज्य में रसोई गैस के संकट पर बनर्जी ने दावा किया कि यह समस्या "कृत्रिम रूप से पैदा की गई।"उन्होंने कहा, "एलपीजी संकट तेल कंपनियों के सर्वर को निष्क्रिय करके कृत्रिम रूप से पैदा किया गया। मैंने उनके प्रतिनिधियों से बात की है, और गैस का कोई वास्तविक संकट नहीं है।"बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने लोगों को केरोसिन उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 मार्च को दिए गए उस बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगी, बनर्जी ने ऐसे बयानों की संवैधानिकता पर सवाल उठाया।तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "अगर वह कहते हैं कि हम आपको बाहर निकाल देंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे, तो मैं यह पूछना चाहती हूं कि क्या इस तरह के बयान संवैधानिक हो सकते हैं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप हो सकते हैं।"
बनर्जी ने भाजपा के शीर्ष नेताओं पर ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नकद पैसे बांटकर भरने का आरोप लगाया।वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के दौरान ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़े जाने और 14 मार्च को कोलकाता में हुई झड़प से तुलना करते हुए उन्होंने कहा, "अब, मोदी की सभा में जाते समय, उन्होंने हमारी मंत्री शशि पांजा के घर में तोड़फोड़ की। भाजपा को शर्म आनी चाहिए।"उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी उसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं करेगी।
उन्होंने लोगों से "भाजपा का बहिष्कार" करने का आह्वान करते हुए आरोप लगाया, "भाजपा मछली और मांस की बिक्री नहीं होने देगी, आपको अपनी मातृभाषा में बोलने नहीं देगी और असहमति को कुचलने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करेगी।बनर्जी ने कहा, ‘‘याद रखिए, बिहार में उन्होंने चुनाव से पहले 10,000 रुपये बांटे थे, लेकिन अब गुपचुप तरीके से वापस ले रहे हैं। वोट से पहले वे पैसे बांटते हैं, और जीतने के बाद बुलडोजर का इस्तेमाल करते हैं।"
उन्होंने आरोप लगाया कि शाह और मोदी लोगों को देश से निकालने के लिए तीन ‘‘गोलियों-एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण), एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) और जनगणना’’ का इस्तेमाल कर रहे हैं।बनर्जी ने भाजपा पर मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए एसआईआर, एनआरसी और जनगणना प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि "तार्किक विसंगति" के तहत लाखों नामों को हटाने की साजिश रची जा रही है।

