बरेली में कड़ी सुरक्षा एवं पुष्प वर्षा के बीच निकली 166 साल पुरानी राम बारात

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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"जय श्री राम" के उद्घोष, पुष्प वर्षा और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोमवार को बरेली में 166 साल पुरानी परंपरा के तहत राम बारात निकाली गयी, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी की भीड़ उमड़ी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

बरेली (उप्र), भाषा। "जय श्री राम" के उद्घोष, पुष्प वर्षा और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोमवार को बरेली में 166 साल पुरानी परंपरा के तहत राम बारात निकाली गयी, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी की भीड़ उमड़ी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ऐतिहासिक जुलूस ब्रह्मपुरी इलाके के नरसिंह मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चार के बाद शुरू हुआ। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियों को लेकर जब रथ चलने लगा, तब मार्ग पर बड़ी भीड़ जमा हो गई। भक्तों ने छतों और बालकनियों से फूलों की वर्षा की, जबकि राम दरबार, हनुमान लीला और अन्य धार्मिक प्रसंगों को दर्शाती झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जुलूस मलूकपुर चौराहा, बिहारी पुर ढाल, कुतुबखाना घंटाघर, नॉवेल्टी चौराहा, बरेली कॉलेज गेट, कालीबाड़ी, श्यामगंज, साहू गोपीनाथ, मठ की चौकी, शिवाजी मार्ग, बड़ा बाजार, किला चौराहा और सिटी सब्जी मंडी से होते हुए मंदिर परिसर में वापस लौटा। इस साल चंद्र ग्रहण के कारण राम बारात होली से एक दिन पहले निकाली गई। कार्यक्रम में बदलाव के बावजूद उत्साह बरकरार रहा, पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे। बरेली शहर के पुलिस अधीक्षक मानुष पारीक ने कहा, "पुलिस और प्रशासन ने पहले से एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने मार्ग का निरीक्षण किया और संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन निगरानी तैनात की गई।"

अधिकारियों ने बताया कि खुफिया नेटवर्क को भी सक्रिय रखा गया है। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के रूप में, मार्ग के किनारे 50 से अधिक मस्जिदों और इमामबाड़ों को तिरपाल की चादरों से ढक दिया गया ताकि उन तक रंग या अन्य सामग्री न पहुंच सके। रामलीला सभा के प्रवक्ता विशाल मेहरोत्रा ने कहा, "सदियों पुरानी परंपरा को पारंपरिक भव्यता के साथ आगे बढ़ाया गया।"

उन्होंने कहा, "ग्रहण और संबंधित 'सूतक' काल के कारण, धार्मिक मानदंडों को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों को एक दिन पहले रथ पर रखा गया था।" अधिकारियों ने बताया कि जुलूस शाम को नरसिंह मंदिर में भक्ति, अनुशासन और सांप्रदायिक सद्भाव के माहौल में संपन्न हुआ।

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