एशियाड स्वर्ण पदक विजेता और 1500 मी के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी जॉनसन ने संन्यास की घोषणा की

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और भारतीय धावक जिन्सन जॉनसन ने बुधवार को संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि 15 वर्षों के करियर के बाद अब कुछ नया करने का समय आ गया है।

नयी दिल्ली, भाषा। एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और भारतीय धावक जिन्सन जॉनसन ने बुधवार को संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि 15 वर्षों के करियर के बाद अब कुछ नया करने का समय आ गया है। केरल के इस 34 वर्षीय एथलीट ने कहा कि उनका सफर ‘मुश्किल ट्रेनिंग, संघर्षों और दर्दनाक चोटों’ से भरा रहा। जॉनसन ने अक्टूबर 2023 में हांग्झोउ एशियाई खेलों में 1500 मीटर में कांस्य पदक जीतने के बाद से किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ क्षण 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में 1500 मीटर में तीन मिनट 44.72 सेकेंड के समय से स्वर्ण पदक जीतना रहा। इन्हीं खेलों में उन्होंने 800 मीटर में रजत पदक भी जीता था।

जॉनसन ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘सपने देखने वाले लड़के की यात्रा कोलकाता स शुरू हुई और 2023 हांग्झोउ एशियाई खेलों के पोडियम तक पहुंची। धन्यवाद, एथलेटिक्स। ’’ इस एथलीट ने लिखा, ‘‘कुछ यात्राएं मीटर और सेकेंड में मापी जाती हैं। कुछ आंसुओं, बलिदानों, आस्था और उन लोगों से देखी जाती हैं जो आपको कभी गिरने नहीं देते। ’’ जॉनसन ने 2018 में गुवाहाटी में राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप के दौरान एक मिनट 45.65 सेकेंड का समय निकालकर महान एथलीट श्रीराम सिंह का 42 साल पुराना पुरुषों का 800 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। हालांकि यह रिकॉर्ड 2025 में मोहम्मद अफसल ने तोड़ दिया।

गोल्ड कोस्ट 2018 राष्ट्रमंडल खेलों (ऑस्ट्रेलिया) में जॉनसन ने तीन मिनट 37.86 सेकेंड का समय निकालकर बहादुर प्रसाद का 23 साल पुराना 1500 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। हालांकि वे फाइनल में पांचवें स्थान पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में दो बार और सुधार किया जिसमें 2019 में बर्लिन मीट में बनाया गया 3:35.24 सेकेंड का समय उनका सर्वश्रेष्ठ रहा।  उन्होंने कहा, ‘‘दो राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना और भारतीय एथलेटिक्स में योगदान देना मेरे जीवन के सबसे गौरवशाली पलों में से एक रहेगा। ’’

जॉनसन ने कहा, ‘‘मुझे ओलंपिक खेलों, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिला। हर बार जब मैंने तिरंगा ओढा , तो मैं सिर्फ पैरों से नहीं बल्कि दिल से दौड़ा। ’’ अपने लंबे सफर को याद करते हुए जॉनसन ने कहा, ‘‘मेरी यात्रा 2007 में कोलकाता से शुरू हुई, जब स्कूल नेशनल में मैंने अपना पहला पदक जीता। तब मुझे नहीं पता था कि यह रास्ता मुझे कहां ले जाएगा। मुझे बस इतना पता था कि मैं भारत के लिए दौड़ना चाहता हूं। ’’

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उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद का जीवन मुश्किल ट्रेनिंग, संघर्षों, दर्दनाक चोटों, ट्रैक, परीक्षा लेने वाली वापसी और ऐसे पलों से भरा रहा जिन्होंने हर बलिदान को सार्थक बना दिया। ’’ जॉनसन के लिए करियर का सर्वश्रेष्ठ वर्ष 2018 रहा। उन्होंने कहा, ‘‘2018 में मैं एशिया का शीर्ष एथलीट बना जिससे मुझे ओस्ट्रावा में ‘आईएएएफ वर्ल्ड कॉन्टिनेंटल कप’ में एशिया-पैसिफिक का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। वह साल वास्तव में यादगार था, मैंने जकार्ता एशियाई खेलों में 1500 मीटर में स्वर्ण और 800 मीटर में रजत पदक जीता। ’’

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उन्होंने आगे कहा, ‘‘सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन 2019 में कोविड-19 और एड़ी की गंभीर चोट ने मेरे करियर को बुरी तरह प्रभावित किया। तीन साल के संघर्ष और इससे उबरने के बाद मैंने हांग्झोउ एशियाई खेलों 2023 में कांस्य पदक जीता जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेरी अंतिम दौड़ थी। ’’ जॉनसन ने अपने कोच, साथी खिलाड़ियों, सरकार और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) को मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

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उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा सिर्फ मेरी नहीं थी। पर्दे के पीछे अथक मेहनत करने वाले सभी लोगों का दिल से धन्यवाद जो अकसर दिखाई नहीं देते, लेकिन हमेशा महसूस होते हैं। हर दिन मुझे आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद। ’’ जॉनसन ने कहा, ‘‘आपने दर्द को प्रगति में और संघर्ष को ताकत में बदला। आपके बिना मैं वह एथलीट नहीं बन पाता जो आज हूं। ’’

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