आम बजट गरीब और किसान विरोधी, हिमाचल प्रदेश की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया : सुक्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश केंद्रीय बजट पर निराशा व्यक्त करते हुए इसे गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी करार दिया।
शिमला, भाषा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश केंद्रीय बजट पर निराशा व्यक्त करते हुए इसे गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में समाज के प्रमुख वर्गों के हितों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया गया है। सुक्खू ने हाल ही में पेश की गई 2026-31 की अवधि के लिए 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की, विशेष रूप से बार-बार अभ्यावेदन, विस्तृत ज्ञापन और तकनीकी प्रस्तुतियों के बावजूद राज्य को सार्थक राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) प्रदान करने में इसकी विफलता पर।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) में केंद्र सरकार से राज्य-विशिष्ट अनुदानों का प्रावधान है, जिसे आरडीजी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘1952 से लेकर 15वें वित्त आयोग तक, केंद्र द्वारा राज्यों को ये अनुदान नियमित रूप से प्रदान किए जाते थे। हालांकि, पहली बार 16वें वित्त आयोग ने इस अनुदान को बंद कर दिया है।’’ सुक्खू ने कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक राज्य की अर्थव्यवस्था में करीब 5,000 करोड़ रुपये का योगदान देते हैं और हजारों परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन उन्हें केंद्रीय बजट में कोई मान्यता नहीं मिली है।’’
उन्होंने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र में बनी हुई चुनौतियों जैसे अपर्याप्त समर्थन मूल्य और उन्नत कृषि पद्धतियों की कमी, बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण में अपर्याप्त निवेश शामिल हैं से निपटने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं दिखता। सुक्खू ने कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश, कई अन्य राज्यों की तरह, कठिनाइयों का सामना कर रहा है क्योंकि बजट आम भारतीय नागरिकों की तुलना में अमीरों के पक्ष में प्रतीत होता है।’’ उन्होंने कहा कि बजट में हिमाचल प्रदेश में रेल नेटवर्क के विस्तार की लंबे समय से लंबित मांग को नजरअंदाज कर दिया गया है, और भानुपाली-बिलासपुर और बद्दी-चंडीगढ़ रेल लाइन जैसी प्रमुख परियोजनाओं के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है।

