गाजियाबाद बहनें आत्महत्या मामला : ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
On

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों के जीवन में सीमित सामाजिक संपर्क, काल्पनिक और वास्तविक जीवन के बीच अंतर नहीं कर पाने के साथ व्यसनकारी ऑनलाइन गेमिंग का यह जहरीला मिश्रण उन्हें उस अंधकारमय मार्ग पर ले जा सकता है।

नयी दिल्ली, भाषा। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों के जीवन में सीमित सामाजिक संपर्क, काल्पनिक और वास्तविक जीवन के बीच अंतर नहीं कर पाने के साथ व्यसनकारी ऑनलाइन गेमिंग का यह जहरीला मिश्रण उन्हें उस अंधकारमय मार्ग पर ले जा सकता है जिसका अंत आत्महत्या के रूप में सामने आ सकता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने मंगलवार देर रात टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस की जांच में पता चला है कि तीनों बहनें एक ऑनलाइन कोरियाई गेम की आदी थीं जिसमें कई तरह के कार्य शामिल थे।

उनके पिता चेतन कुमार ने बताया कि वे लगभग तीन साल से यह गेम खेल रहीं थीं और तब से स्कूल भी नहीं गई थीं। आत्महत्या करने वाली तीन नाबालिग बहनों के कमरे से मिली नौ पन्नों की एक छोटी-सी डायरी चीख-चीखकर उनकी खामोश तकलीफ बयां कर रही है। रंगीन कोरियाई दुनिया के सपनों, पसंदीदा कलाकारों और कल्पनाओं के बीच लिखे गए ये पन्ने उस घर के भीतर पल रहे तनाव और मानसिक पीड़ा की कहानी भी कहते हैं जिसने अंततः तीनों को यह भयावह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

पुलिस के अनुसार, डायरी के पन्नों में बार-बार कोरिया के लिए तीनों बहनों के गहरे लगाव का जिक्र है और उनमें लिखे संदेश से साफ झलकता है कि परिवार की ओर से उन्हें उनकी ख्याली दुनिया, उन पसंदों और उस पहचान को छोड़ देने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे वे दिल से जुड़ी हुई थीं। डायरी में लिखा है, ‘‘हमें कोरियन बहुत पसंद है। प्यार, प्यार, प्यार।’’ इसे ही अपनी ‘‘असल जिंदगी की कहानी’’ बताते हुए लिखा गया है कि जो कुछ इन पन्नों में दर्ज है, उस पर भरोसा किया जाए।

डायरी में यह आरोप भी लगाया गया है कि माता-पिता उनकी पसंद और भविष्य के फैसलों, यहां तक कि शादी को लेकर भी उनके खिलाफ थे। एक जगह लिखा है, “आपने (माता-पिता) हमें कोरियन छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। कोरियन ही हमारी जिंदगी थी… आप हमारी शादी किसी भारतीय से करवाना चाहते थे, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो सकता।” इसमें सजा दिए जाने का जिक्र भी किया गया है और अंत बेहद दर्दनाक शब्दों के साथ होता है। बहनों ने अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा, “आपकी मार से हमारे लिए मौत बेहतर है। इसी वजह से हम आत्महत्या कर रहे हैं… सॉरी पापा।”

Read More कांग्रेस ने गोगोई की अध्यक्षता में असम के लिए चुनाव समिति का गठन किया

वैशाली के मैक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट वंदना प्रकाश के अनुसार समय और संसाधनों की बर्बादी के अलावा, ऑनलाइन गेमिंग की लत व्यक्तियों को स्कूल, कार्यालय और बाहरी खेलों जैसी सार्थक गतिविधियों से दूर रख सकती है। प्रकाश ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के प्रति आगाह करते हुए कहा, ‘‘ इससे व्यक्ति सामाजिक मेलजोल से दूर हो जाता है, जिससे वह एकाकी और अकेला महसूस करने लगता है। जीवन में व्यस्तता की कमी और वास्तविक दुनिया से दूरी अक्सर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, जिससे वह आत्महत्या करने की ओर अग्रसर हो सकता है।’’

Read More भाजपा विधायकों ने विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर प्रदर्शनरत छात्रों का किया समर्थन

इस कथित आत्महत्या की घटना ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के गंभीर प्रभावों और युवाओं के बीच कोरियाई संस्कृति के प्रति बढ़ती दीवानगी पर ध्यान केंद्रित किया। इसे लेकर अन्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक दीप्ति पुराणिक ने कहा कि किशोर खुद को अपनी गेमर पहचान से जोड़ते हैं और इसे छीन लेने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दीप्ति पुराणिक ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के प्रति आगाह करते हुए कहा, ‘‘ उनकी पूरी मानसिकता वास्तविक जीवन की बजाय उस खेल में उनकी दक्षता के इर्द-गिर्द घूमने लगती है।

Read More यूडीएफ उम्मीदवार की घोषणा से पहले बेपोर विधानसभा में सक्रिय हुए पी.वी अनवर

जब आप उनसे यह क्षमता छीन लेते हैं, तो एक व्यक्ति के रूप में उनकी पहचान बिखर जाती है। वे पूर्णतः भावनात्मक अलगाव का अनुभव कर सकते हैं, जो उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। ’’ मुंबई स्थित मनोवैज्ञानिक दीप्ति पुराणिक ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘ गेम खेलने से इन बच्चों को इनाम या सराहना के रूप में आनंद मिलता है। गेम खेलने से सीधे तौर पर कोई व्यक्ति हिंसक कदम नहीं उठाता, लेकिन यह कई ऐसे कारकों को जन्म दे सकता है जो किसी व्यक्ति के जीवन को अस्त-व्यस्त और अनियंत्रित बना सकते हैं।’’ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट श्वेता शर्मा के अनुसार,‘‘माता-पिता के पास समय नहीं है।

भावनात्मक समर्थन तो बिल्कुल नहीं मिलता। हम बच्चों को यह समझे बिना सारी सुविधाएं दे रहे हैं कि वे उन्हें संभाल पाएंगे या नहीं। इसलिए उनकी भावनात्मक ज़रूरत पूरी नहीं हो पा रही है।’’ गुड़गांव स्थित श्वेता शर्मा ने कहा, ‘‘कोरियाई संस्कृति में, अगर आप कोई सीरीज़, कोई गेम या कुछ भी देखें, जो वे बना रहे हैं, वो ज़्यादातर दोस्ती, प्यार और अपनेपन की भावना पर आधारित होते हैं।’’ शर्मा की बात 2024 की एक घटना से मेल खाती है, जब महाराष्ट्र के एक गांव की तीन स्कूली लड़कियों ने अपने पसंदीदा कोरियन बैंड बीटीएस से मिलने के लिए कोरिया जाने का फैसला किया था।

संबंधित समाचार