शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर छात्रों में आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति, लचीलापन और ईमानदारी विकसित करनी चाहिए।
कोल्लम (केरल), भाषा। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर छात्रों में आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति, लचीलापन और ईमानदारी विकसित करनी चाहिए। वे जिले के पथानापुरम में स्थित सेंट स्टीफंस हायर सेकेंडरी स्कूल के शताब्दी समारोह का उद्घाटन कर रहे थे। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने 100 वर्ष पूरे होने को एक “उल्लेखनीय उपलब्धि” बताया, जिसे बहुत कम संस्थानों ने हासिल किया है।
उन्होंने उल्लेख किया कि इस विद्यालय ने एक शताब्दी के दौरान विचारों को आकार देने, चरित्र का निर्माण करने और भविष्य संवारने का कार्य किया है। इसकी कई पीढ़ियां जिम्मेदार नागरिकों, नेताओं, पेशेवरों और संवेदनशील इंसानों के रूप में आगे बढ़ी हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी संस्था की असली ताकत उसके ढांचे में नहीं बल्कि उसके मूल्यों में निहित होती है, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उत्सव केवल अतीत के बारे में ही नहीं बल्कि भविष्य के बारे में भी है।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार से प्रेरित तेजी से बदलती दुनिया में, शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति, लचीलापन और ईमानदारी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने, विनम्र रहने और विद्यालय द्वारा सिखाए गए मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उपराष्ट्रपति ने छात्रों से “मादक पदार्थों को ना कहने” का भी आग्रह किया। उन्होंने मादक पदार्थों के दुरुपयोग को समाज को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े अभिशापों में से एक बताया
इस बात पर जोर दिया कि मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ अभियान एक जन आंदोलन बनना चाहिए जो धर्मों, भाषाओं और राजनीतिक दलों से परे हो। राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि समाज की सेवा करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एक सकारात्मक और स्वागत योग्य विकास है।

