तलाक और पुनर्विवाह के बाद मामले को जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग : उत्तराखंड उच्च न्यायालय
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तलाक और पुनर्विवाह के बाद वैवाहिक विवाद से संबंधित एक आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
नैनीताल, भाषा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तलाक और पुनर्विवाह के बाद वैवाहिक विवाद से संबंधित एक आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपपत्र और समन आदेश सहित देहरादून के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित सभी सुनवाइयों को निरस्त कर दिया।
एक अधिकारी ने बताया कि याचिकाकर्ता व प्रतिवादी का विवाह 28 सितंबर 2009 को हुआ था और उनका एक बच्चा भी है।उन्होंने बताया कि स्वभाव में भिन्नता और वैवाहिक कलह के कारण पति-पत्नी अलग—अलग रहने लगे और वर्ष 2016 में प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए, 323 और दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई।
पति की तरफ से अदालत में दलील दी गयी कि ये आरोप झूठे और अतिरंजित थे।पति ने मामले की सुनवाई के दौरान तलाक के लिए एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने 2018 में स्वीकार कर लिया था और तलाक के बाद पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया।अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि यह मामला वैवाहिक विवाद से उपजा था।
हालांकि जब विवाह समाप्त हो चुका हैतो ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से पूर्व पति का अनावश्यक उत्पीड़न होगा और यह अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।उच्च न्यायालय ने इसके बाद मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया।

