अदालत ने राहुल, अखिलेश से जुड़े यूजीसी विरोध प्रदर्शन मामले में पुलिस से नयी स्थिति रिपोर्ट मांगी
यहां की एक अदालत ने शनिवार को दिल्ली पुलिस को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित 11 राजनीतिक नेताओं के खिलाफ दायर एक मामले में नयी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
नयी दिल्ली, भाषा। यहां की एक अदालत ने शनिवार को दिल्ली पुलिस को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित 11 राजनीतिक नेताओं के खिलाफ दायर एक मामले में नयी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।यह मामला फरवरी 2025 में जंतर-मंतर पर यूजीसी के मसौदा नियमों के खिलाफ द्रमुक द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन से संबंधित है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट “बिना सोचे-समझे यांत्रिक ढंग से” दाखिल की गई प्रतीत होती है।गांधी और यादव के अलावा, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसद कनिमोई और ए. राजा भी उन लोगों में शामिल थे जिनके खिलाफ कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
इससे पहले, 19 फरवरी को, अदालत ने दिल्ली पुलिस को मामले में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि जब विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर हुआ था, जो विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित क्षेत्र है, तो सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (ए) (आदेश की विधिवत अवज्ञा) क्यों लगाई गई थी।
पुलिस द्वारा दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद, अदालत ने शनिवार को असंतोष व्यक्त किया।अदालत ने कहा कि मामले के जांच अधिकारी (आईओ) ने आगे की जांच पूरी करने के लिए कोई समयसीमा नहीं दी है।उसने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि यह चालान बिना सोचे-समझे, यांत्रिक ढंग से आगे बढ़ा दिया गया है। जांच अधिकारी अपने कर्तव्य में विफल रहे हैं और उन्होंने अदालत के समक्ष कोई नए तथ्य या सबूत प्रकट किए बिना या प्रस्तुत किए बिना आगे की जांच का अनुरोध करते हुए आवेदन दायर किया है।”
अदालत ने यह भी गौर किया कि पुलिस द्वारा दायर जवाब में यह उल्लेख नहीं किया गया था कि आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस क्यों नहीं भेजे गए।अदालत ने कहा कि वह आगे की जांच के अनुरोध पर तभी विचार करेगी जब पुलिस पहले उठाए गए मुद्दों के संबंध में स्पष्टीकरण प्रदान करेगी।इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की गई।

