मणिपुर: हिमयुग के दौरान एशिया में कांटेदार बांस की उपस्थिति के जीवाश्म साक्ष्य मिले

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले में एक क्षेत्र के सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिकों को जीवाश्म साक्ष्य मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि हिमयुग के दौरान एशिया में कांटेदार बांस मौजूद थे। एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।

इंफाल, भाषा। मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले में एक क्षेत्र के सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिकों को जीवाश्म साक्ष्य मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि हिमयुग के दौरान एशिया में कांटेदार बांस मौजूद थे। एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान ‘बीरबल साहनी इंस्टीट्यूशन ऑफ पैलियोसाइंसेज’ (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों को मणिपुर की इंफाल घाटी में चिरांग नदी के पास सर्वेक्षण के दौरान असामान्य निशान वाले बांस के तने के बारे में पता चला। विस्तृत विश्लेषण के दौरान पता चला कि ये निशान कांटों के हैं।

इसके बाद इसकी पहचान और महत्व के बारे में विस्तृत पड़ताल शुरू की गई। प्रयोगशाला में इसकी आकृति का अध्ययन करके, उन्होंने इसे चिमोनोबाम्बुसा वंश का माना। जीवित कांटेदार बांसों, जैसे कि बैम्बुसा बैम्बोस और चिमोनोबाम्बुसा कैलोस से तुलना करने पर इसके रक्षात्मक गुणों और पारिस्थितिकी भूमिका को समझने में मदद मिली। विज्ञप्ति में कहा गया है, "यह पहला जीवाश्म साक्ष्य है कि बांस में शाकाहारियों से बचने के लिए कांटे हिमयुग के दौरान एशिया में पहले से ही मौजूद थे। विज्ञप्ति में कहा गया है

कि इसका संरक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ठंडी और शुष्क वैश्विक जलवायु के उस दौर से जुड़ा है, जब यूरोप समेत कई अन्य क्षेत्रों में बांस का सफाया हो गया था। जीवाश्म दर्शाता है कि एक ओर जहां हिमयुग में कठोर परिस्थितियों के कारण वैश्विक स्तर पर बांस का अभाव हो गया था, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में इसे सुरक्षित वातावरण मिला और यह फलता-फूलता रहा।” ‘रिव्यू ऑफ पैलियोबॉटनी एंड पैलिनोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित यह खोज कांटों के निशान जैसे विवरणों को समझने के लिहाज से उल्लेखनीय है।

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