कुछ वैश्विक महाशक्तियों पर निर्भर रहे बिना मानवता के काम आनी चाहिए एआई तकनीक: मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्षमता और प्रतिभा विकसित करनी चाहिए।
नयी दिल्ली, भाषा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्षमता और प्रतिभा विकसित करनी चाहिए, ताकि इसका विकास मानवता के हित में हो और कुछ गिने-चुने वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
स्वास्थ्य देखभाल और उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत-फ्रांस के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और मैक्रों ने बुधवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ‘‘स्वास्थ्य में एआई के लिए एक भारत-फ्रांस केंद्र’’ (आईएफ-सीएआईएच) का उद्घाटन किया।
इस मौके पर मैक्रों ने कहा, “भारत और फ्रांस अपनी भरोसेमंद एआई प्रणाली बनाने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि हम सिर्फ कहीं और बनाई तथा प्रबंधित प्रौद्योगिकियों पर निर्भर नहीं रह सकते।”
जिम्मेदारी पूर्ण शासन पर जोर देते हुए मैक्रों ने कहा, “बच्चों की मजबूत सुरक्षा, पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए एल्गोरिद्म में पारदर्शिता और भाषाई तथा सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता के साथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से मानवता की सेवा होनी चाहिए। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत और फ्रांस एक जैसा दृष्टिकोण साझा करते हैं।”
उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने और वैज्ञानिक खोज में तेजी लाने के लिए सभी क्षेत्रों में, खासकर स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में, नैतिक एआई अपनाने की परिवर्तनकारी क्षमता पर भी जोर दिया।मैक्रों ने छात्रों से भी बातचीत की और युवा अनुसंधानकर्ताओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार-आधारित समाधान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
आईएफ-सीएआईएच एक नई पहल है, जिसका मकसद एआई आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार को आगे बढ़ाना है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी मुश्किल चुनौतियों का सामना किया जा सके।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह डिजिटल स्वास्थ्य में भारत-फ्रांस के सहयोग में एक अहम मील का पत्थर है और समान तथा प्रौद्योगिकी वाले स्वास्थ्य समाधानों में वैश्विक नेता बनने के भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करता है।
केंद्र का उद्घाटन ‘रेनकॉन्ट्रेस यूनिवर्सिटेयर्स ऐट साइंटिफिक्स डी हौट निव्यू’ (रश) के साथ हुआ, जो 18-19 फरवरी को एम्स, दिल्ली में हो रही अकादमिक और वैज्ञानिक बैठकों की एक शृंखला है। इनका आयोजन फ्रांसीसी दूतावास के समन्वय से हो रहा है।‘रश 2026’ के तहत मैक्रों और दो भारतीय युवा नवप्रवर्तकों- प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के बीच ‘रश- कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बातचीत’ नाम की 30 मिनट की विशेष बातचीत हुई।

