शल्य चिकित्सा में हुई चूक के मामले में महिला ने केरल की स्वास्थ्य मंत्री को ‘विफल’ बताया
कोझिकोड की एक महिला ने शल्य चिकित्सा में हुई चूक के मामले में रविवार को केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज को ‘विफल’ करार दिया और कहा कि उसके मामले में न्याय नहीं हुआ है।
कोझिकोड (केरल), भाषा। कोझिकोड की एक महिला ने शल्य चिकित्सा में हुई चूक के मामले में रविवार को केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज को ‘विफल’ करार दिया और कहा कि उसके मामले में न्याय नहीं हुआ है। वर्ष 2017 में यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रसव के दौरान महिला का ऑपरेशन हुआ था और इसके कई वर्षों बाद उसके पेट में सर्जरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कैंची पायी गई। पंथीरंकावु के पास मनक्कडावु की मूल निवासी हर्षीना ने पत्रकारों को बताया कि स्वास्थ्य मंत्री का यह दावा गलत है कि उनकी समस्याओं का समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें मुआवजा हासिल करने के लिए कई बार विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।
हर्षीना (24) का 2017 में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद से उन्हें लगातार दर्द रहने लगा। वर्ष 2022 में एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान उनके पेट में कैंची होने का पता चला। उसी वर्ष सर्जरी द्वारा इसे निकाल दिया गया। हाल ही में इसी तरह का एक मामला सामने आया था जिसमें पुन्नप्रा की रहने वाली उषा जोसेफ (51) के पेट के अंदर एक कैंची पाई गई थी। जोसेफ की मई 2021 में अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में एक सर्जरी हुई थी।
हर्षीना ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद चिकित्सकों की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया। यह महसूस करते हुए कि हमें स्वास्थ्य विभाग से न्याय नहीं मिलेगा, हमने फरवरी 2023 में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।’’ उन्होंने बताया कि एक कार्रवाई परिषद गठित होने के बाद, परिवार ने मार्च 2023 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें इसे चिकित्सा लापरवाही का मामला बताया गया। हर्षीना ने कहा, ‘‘इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने हस्तक्षेप किया। हालांकि उन्होंने (मंत्री) दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी थी, लेकिन मामला हमारी शिकायत पर ही दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन पर हमने भरोसा किया। उन्होंने 15 दिनों के भीतर हमारी चिंताओं का समाधान करने का वादा किया था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हमने नए सिरे से विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।’’ हर्षीना के अनुसार, नए सिरे से विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद ही सरकार ने दो लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें शामिल चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि मेरी समस्या का समाधान हो गया है।
लेकिन बदले में क्या दिया गया? मुझे जो कुछ सहना पड़ा और जिस दर्द से मैं अब भी जूझ रही हूं, उसके बदले में सिर्फ दो लाख रुपये दिए गए।’’ इस बीच, माकपा के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने रविवार को कहा कि चिकित्सा संबंधी लापरवाही के मामले ‘‘नगण्य’’ हैं और इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश किया जाना चाहिए। गोविंदन ने कहा, ‘‘लाखों ऑपरेशन हो रहे हैं। बड़ी संख्या में यहां होने वाले ऑपरेशन की संख्या पर विचार किए बिना इसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश किया जाना चाहिए। एक-दो घटनाएं हो सकती हैं, और यह कोई आमतौर पर होने वाली घटना नहीं है।’’

