ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच साठगांठ का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर सोमवार को निर्वाचन आयोग और भाजपा पर साठगांठ कर वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया।
कोलकाता, भाषा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर सोमवार को निर्वाचन आयोग और भाजपा पर साठगांठ कर वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की मदद के लिए ये ‘‘साजिश’’ रची गई है। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 28 फरवरी को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बनर्जी ने दावा किया कि चुनावों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भाजपा और आयोग द्वारा ‘‘जानबूझकर’’ नाम हटाए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया, ‘‘निर्वाचन आयोग ने जानबूझकर असली मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। मैं स्तब्ध हूं। यह बहुत दुखद और अमानवीय स्थिति है।’’ एसआईआर के बाद मतदाता सूची से 63.66 लाख नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का 8.3 प्रतिशत है। एसआईआर के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गयी है। इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में रखा गया है, जिनकी आने वाले हफ्तों में जांच की जाएगी। राज्य में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।
अपने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में भी ‘‘बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने’’ का दावा करते हुए, बनर्जी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे जितने भी मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएं, वह विजयी होंगी। एसआईआर के बाद की मतदाता सूची के प्रकाशन ने राज्य में एक राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से लाखों नाम हटा दिए गए हैं। बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा मतदाता सूची से नाम हटाने का सहारा ले रही है, क्योंकि वह ‘‘अपनी योग्यता के बल पर चुनाव नहीं जीत सकती।’’
मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘वे चुनाव नहीं जीत सकते, क्योंकि लोग उन्हें वोट नहीं देंगे। इसलिए वे मतदाता सूची से नाम हटा रहे हैं।’’ इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन को और तेज करने का संकेत देते हुए, पार्टी प्रमुख बनर्जी ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच वैध मतदाताओं के नाम हटाने के ‘‘गठजोड़’’ के खिलाफ छह मार्च से धरना देंगी। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा, ‘‘यह बंगाल में पार्टी की आखिरी यात्रा होगी।’’
बनर्जी ने कहा, ‘‘भवानीपुर एक छोटा निर्वाचन क्षेत्र है। यहां लगभग 2.6 लाख मतदाता ही थे। पहले 44,000 मतदाताओं का नाम हटा दिया गया था। इस बार 14,000 और मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ रखा गया है, और लगभग 2,000 मतदाताओं को तथाकथित व्यवस्थागत त्रुटियों के कारण बाहर किया गया है। ये मतदाता कहां हैं? ये कहां गायब हो गये? भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 60,000 मतदाताओं को हटाए जाने के बावजूद जीत मेरी ही होगी।’’ विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद कहा था कि ‘‘अब ममता को कोई नहीं बचा सकता।’’
बनर्जी ने सोमवार को पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के नाम चुनिंदा तरीके से हटाए जा रहे हैं। बनर्जी ने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने टीएमसी समर्थकों के नाम हटा दिए हैं। उन्हें जनता पर भरोसा नहीं है; उन्हें सिर्फ केंद्रीय एजेंसियों पर भरोसा है। वे हमें डरा नहीं सकते।’’ भाजपा नेताओं पर एजेंसियों के माध्यम से नाम हटवाने का आरोप लगाते हुए, बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के कब्जे वाले कई निर्वाचन क्षेत्रों में 10,000 से 30,000 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वे लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं लड़ सकते। इसलिए, वे पक्षपात के जरिए और लोकतंत्र को खत्म करके सत्ता हथियाने की कोशिश करते हैं।’’

