इस्तीफा देने वाले बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कलेक्ट्रेट में धरना दिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सोमवार देर रात निलंबित कर दिया।
बरेली/लखनऊ, भाषा। उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में सोमवार देर रात निलंबित कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।हालांकि, अग्निहोत्री ने कहा कि वह एक दिन पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में धरना दिया और अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया।
अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।सोमवार देर रात जारी एक आदेश के अनुसार, अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और साथ ही उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति अनुभाग-सात से विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि अग्निहोत्री ने प्रथम दृष्ट्या अनुशासनहीनता की है, जिसके कारण तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित किया गया है।आदेश में कहा गया है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अग्निहोत्री के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए बरेली मंडल के आयुक्त बीएस चौधरी को जांच अधिकारी नामित किया जाता है।
विशेष सचिव गर्ग ने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा।अपने इस्तीफे के साथ अग्निहोत्री ने एक वक्तव्य जारी किया जिसमें नए यूजीसी नियमों को ‘‘काला कानून’’ बताया।मंगलवार सुबह अग्निहोत्री के सरकारी आवास के बाहर पुलिसकर्मी तैनात होने के बावजूद,
वह अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट तक पैदल गए।विरोध-प्रदर्शन के दौरान, अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची गई है।उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि सोमवार रात को उन्हें जिलाधिकारी के आवास पर हिरासत में लेने की कोशिश की गई थी। हालांकि, इन आरोपों को जिला प्रशासन पहले ही निराधार बता चुका है।
अग्निहोत्री ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह उच्च न्यायालय जाएंगे, और अपने ‘‘उत्पीड़न’’ का मामला उच्चतम न्यायालय तक भी ले जाएंगे।सुबह करीब आधे घंटे तक उनके समर्थको ने जिलाधिकारी के कक्ष के बाहर नारे लगाए गए।इस बीच, नगर मजिस्ट्रेट के आवास पर स्थित अपर जिलाधिकारी परिसर का मुख्य द्वार पुलिस ने बंद कर दिया।
इससे पहले अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने निलंबन पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह एक दिन पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है और यह भी दावा किया कि सोमवार रात को जिलाधिकारी कार्यालय में हुई एक घटना के दौरान उन्होंने अपने बारे में अपमानजनक टिप्पणी सुनी थी।
मंगलवार सुबह यहां अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बातचीत में अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही सेवा से इस्तीफा दे दिया है और इसलिए निलंबन आदेश पर उन्हें कुछ नहीं कहना है।उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं, मैंने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद, आप मुझे निलंबित करें या कोई और कार्रवाई करें, इस पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।’’
हालांकि, अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि पिछली रात जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में हुई एक घटना के दौरान, उन्होंने फोन के स्पीकर मोड पर एक बातचीत सुनी, जिसमें एक व्यक्ति ने कथित तौर पर जिलाधिकारी सिंह से कहा, ‘‘पंडित पागल हो गए हैं, उन्हें पूरी रात बैठाए रखें।’’उन्होंने दावा किया कि जैसे ही यह जानकारी पूरे राज्य में फैली, उन्हें कई जिलों से फोन आए और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए आपत्ति जताई।
अग्निहोत्री ने कहा कि उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है और विभागीय जांच का आदेश दिया गया है।अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें अपना इस्तीफा एक दिन या उससे अधिक समय के लिए टालने या लिखित आवेदन देने के बाद छुट्टी पर जाने के लिए मनाने का प्रयास किया गया, जिससे उन्हें पहले निलंबित करने और ‘‘मामले को बदलने’’ का अवसर मिल जाता।
उन्होंने दावा किया, ‘‘सौभाग्य से, मैं वहां मौजूद था और मैंने खुद बातचीत सुनी।’’अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें इस्तीफा टालने के लिए मनाने के प्रयास किए गए ताकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो निलंबन आदेश देर रात जारी किया गया।’’अग्निहोत्री ने यह भी दावा किया कि व्यवस्था के भीतर ‘‘ब्राह्मण-विरोधी पूर्वाग्रह’’ की धारणा है।
आगे के कदमों के बारे में उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले जिलाधिकारी के कार्यालय जाएंगे और मीडिया के माध्यम से भी यह स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे कि फोन किसने किया और कथित टिप्पणी किसने की।अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने अपना सरकारी आवास लगभग खाली कर दिया है और अपना अधिकतर सामान वहां से हटा लिया है।मंगलवार को, अपर जिलाधिकारी पूर्णिमा सिंह, अपर जिलाधिकारी (नगर) सौरव दुबे, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) देश दीपक सिंह, उप जिलाधिकारी सदर प्रमोद कुमार, और पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विरोध स्थल पर पहुंचे।
अधिकारियों ने बातचीत के ज़रिए हल निकालने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताएं सरकार तक पहुंचा दी जाएंगी, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका।बातचीत के दौरान, अलंकार अग्निहोत्री अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने, ‘‘ कहा कि जब तक जिलाधिकारी खुद आकर यह साफ नहीं कर देते कि फोन कॉल में कथित तौर पर किसकी तरफ से गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया था, तब तक वह प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे।’’
माहौल एक पल के लिए तनावपूर्ण हो गया, जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा, "क्या आप मुझे गिरफ्तार करने आए हैं?" हालांकि, अधिकारियों ने स्थिति को संभाला और बातचीत जारी रखने की कोशिश की।अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे (सोमवार को) के बाद, उन्हें बातचीत के बहाने जिलाधिकारी के घर बुलाया गया, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उनका दावा है कि लखनऊ से जिलाधिकारी अविनाश सिंह को आए एक फोन कॉल में उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था,
उसी कॉल में उन्हें हिरासत में लेने के निर्देश दिए गए थे।मंगलवार को अपर जिलाधिकारी (नगर) सौरव दुबे ने कहा कि सोमवार शाम को अग्निहोत्री बातचीत के लिए जिलाधिकारी के घर आए थे। बातचीत बहुत अच्छे माहौल में हुई, और उन्हें किसी भी तरह से बंधक नहीं बनाया गया। किसी भी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया।अग्निहोत्री के जिलाधिकारी पर गाली-गलौज करने के आरोप के बारे में, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) देश दीपक सिंह ने कहा कि जब अग्निहोत्री और जिलाधिकारी के बीच उनके घर पर बातचीत हो रही थी,
उस समय बरेली के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, जिसमें चारों अपर जिलाधिकारी , वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस क्षेत्राधिकारी शामिल थे।उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा बंधक बनाए जाने का अग्निहोत्री का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। जिलाधिकारी के घर पर तैनात स्टाफ ने भी अग्निहोत्री को बंधक बनाए जाने की खबर से इनकार किया।
उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी, 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।

