माहे रमज़ान का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का जरिया : कामिल रज़ा

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
On

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नगर अध्यक्ष कामिल रजा ने रमज़ान के पाक मुबारक महीने पर बताया कि माहे रमज़ान का तीसरा अशरा जहन्नम से निजात का जरिया है।

नेशनल एक्सप्रेस, मुरादाबाद (फहीम अंसारी)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नगर अध्यक्ष कामिल रजा ने रमज़ान के पाक मुबारक महीने पर बताया कि माहे रमज़ान का तीसरा अशरा जहन्नम से निजात का जरिया है। यह अशरा 21 रमज़ान से शुरू होकर 30 रमज़ान तक चलता है। इस दौरान मुस्लिम समाज ज्यादा से ज्यादा इबादत, तौबा और इस्तिग़फ़ार करें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगे इस अशरे में की गई सच्चे व नेक दिल से दुआ और इबादत कबूल होती है। इसी अशरे में शब-ए-क़द्र भी आती है,जो हजार महीनों से बेहतर रात बताई गई है।

इसलिए सभी मुस्लिम भाईयों को इन दिनों में नमाज़, कुरआन की तिलावत और दुआओं में ज्यादा समय बिताना चाहिए। यह अशरा इंसान को जहन्नम की आग से बचने की उम्मीद देता है। भोजपुर नगर अध्यक्ष कामिल रजा ने बताया कि ये जहन्नुम से निजात पाने का समय है। इस महीने में अल्लाह की रहमतें नाजिल होती हैं। मुकद्दस रमजान का महीना बेशुमार बरकतों वाला होता है। इस महीने में रोजेदारों पर अल्लाह तआला की बेशुमार रहमतें बरसती हैं।

गुनाहों की माफी मांगने वाले के सारे गुनाह अल्लाह माफ कर देता है। माह-ए-रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात पा लेने का बड़ा ही माकूल जरिया है। इस दरमियान मोमिनों को चाहिए कि वे इबादतों में मशगुल रह कर पाक-परवर-दिगार से अपने गुनाहों की बख्शायिश करा लें।