टूंडला में धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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रात के अंधेरे में टूंडला तहसील क्षेत्र अवैध खनन माफियाओं का अड्डा बनता जा रहा है।

नेशनल एक्सप्रेस, टूंडला (रामपाल चौधरी)। रात के अंधेरे में टूंडला तहसील क्षेत्र अवैध खनन माफियाओं का अड्डा बनता जा रहा है। बिना किसी सरकारी अनुमति के मिट्टी की खुदाई जोरों पर है। प्रशासन की नाक के नीचे हर रात 10 से 15 ट्रैक्टर मिट्टी भरकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं, जिससे सरकार को प्रतिदिन 5 से 7 लाख रुपये तक के राजस्व की हानि हो रही है।

सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल कुछ अधिकारियों के निजी कर्मचारियों, खासकर ड्राइवरों की मिलीभगत से चल रहा है। 2000 रुपये प्रति ठेली और 5000 रुपये प्रति ट्रॉला की दर से बिक रही यह अवैध मिट्टी इलाके के नालों, गलियों और पुलियाओं को भारी नुकसान पहुंचा रही है। स्थानीय किसानों ने खनन माफियाओं पर रात के समय खेतों से मिट्टी चोरी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इससे न केवल उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं, बल्कि भूमि की उर्वरता पर भी असर पड़ रहा है। पमारी (पचोखरा) में हुई छापामार कार्रवाई में यह स्पष्ट हो गया कि खनन माफिया पहले से ही सतर्क थे और समय रहते भाग निकले। इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों के भीतर से ही माफियाओं को सूचना मिलती है?

खनन अधिकारी से संपर्क करने पर फोन नहीं उठाया गया, जिससे उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। लगातार शिकायतों और खुलासों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

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नगला केशो, छितरई, पमारी, देवखेड़ा, नगला धूरी और नगला सिंघी जैसे इलाके खनन माफियाओं के लिए सुरक्षित ज़ोन बन चुके हैं। प्रशासनिक चुप्पी ने माफियाओं के हौसले और भी बुलंद कर दिए हैं।

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त्योहारों में बढ़ सकता है अवैध खनन

सूत्रों की माने तो आने वाले त्योहारों के अवसर पर सरकारी छुट्टियों का लाभ उठाकर माफियाओं ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन की योजना बनाई है।

ये उठ रहे सवाल — क्या लेखपाल से लेकर अफसरों तक हो रही बंदरबांट

अगर जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध खनन न केवल राजस्व की हानि करेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यावरण और सामाजिक ढांचे पर भी गहरा असर डालेगा।

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