शबरी मिलन बाली वध और हनुमानजी का लंका गमन मंचित

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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नगर में चल रहे रामलीला महोत्सव का रंग रविवार की रात और गहरा गया, जब मंच पर दसवें दिन कई प्रेरणादायी व रोचक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। श्रद्धालु देर रात तक पंडाल में डटे रहे और भावपूर्ण दृश्यों को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे।

गुन्नौर/बबराला। नगर में चल रहे रामलीला महोत्सव का रंग रविवार की रात और गहरा गया, जब मंच पर दसवें दिन कई प्रेरणादायी व रोचक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। श्रद्धालु देर रात तक पंडाल में डटे रहे और भावपूर्ण दृश्यों को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे। महोत्सव का शुभारंभ ब्लॉक प्रमुख आशीष यादव हनी तथा स्वच्छता मित्रों द्वारा सामूहिक आरती से हुआ। इसके बाद वृंदावन के सुप्रसिद्ध श्रीकृष्ण लीला संस्थान के कलाकारों ने मंचन का प्रारंभ किया। 
 
शबरी मिलन का भावुक दृश्य कथा के अनुसार, सीता की खोज में भटकते हुए भगवान राम और लक्ष्मण शबरी की कुटिया पहुंचे। वहां शबरी ने उनके चरण धोकर भक्ति भाव से स्वागत किया और प्रेमपूर्वक जूठे बेर अर्पित किए। शबरी मिलन का दृश्य इतना भावुक था कि पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। 
 
सुग्रीव से मिलन और बाली वध -
कथा आगे बढ़ी और प्रसंग किष्किंधा पर्वत पर पहुंचा। यहां भगवान राम ने सुग्रीव की सहायता कर उसके भाई बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया। इस गठबंधन के साथ ही राम को वानर सेना का सहयोग मिला, जिससे रावण के विरुद्ध संग्राम का मार्ग प्रशस्त हुआ। हनुमानजी का लंका गमन सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना सीता की खोज में निकल पड़ी। इसी क्रम में हनुमानजी ने समुद्र पार कर लंका गमन किया। मंचन में जब हनुमानजी ने विशाल रूप धारण कर छलांग लगाई, तो दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गुंजायमान कर उठे। 
 
अशोक वाटिका में सीता हनुमान भेंट -
लंका पहुंचकर हनुमान अशोक वाटिका में पहुंचे, जहां रावण द्वारा बंदी बनाई गई सीता से उनका भावपूर्ण मिलन हुआ। हनुमान ने सीता को भगवान राम की अंगूठी देकर उनका संदेश सुनाया। इस प्रसंग ने दर्शकों को गहरे भक्ति भाव में डुबो दिया। सीता ने राम से मुक्त कराने की प्रार्थना तो की, लेकिन हनुमान के साथ लौटने से इनकार करते हुए कहा कि वे चाहती हैं भगवान राम स्वयं रावण का वध करें और उन्हें अपने पराक्रम से मुक्त कराएं। पूरे मंचन के दौरान श्रद्धालु कथा के दृश्यों में खोए नजर आए और बार-बार "जय श्रीराम" के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। 
 
व्यवस्थाओं में रहा सहयोग - 
रामलीला के सफल आयोजन में संजीव वर्मा, शुभम वार्ष्णेय, अरुण कुमार डिंपल, नितिन आइडिया, निशांत गुप्ता मंकित, प्रशांत वार्ष्णेय, दुष्यंत वार्ष्णेय, महेंद्र प्रजापति, गोपेश कुमार, सुधीर वर्मा और सुरेश कुशवाह का विशेष सहयोग रहा। अगली कड़ी में दर्शक भगवान राम के रावण से युद्ध और लंका दहन जैसे रोमांचक प्रसंगों का आनंद उठाएंगे।

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