सूरजकुंड झूला हादसा: झूला संचालक और उसका एक कर्मचारी गिरफ्तार
हरियाणा में फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला मैदान में एक विशाल झूले ‘सुनामी’ के टूटकर गिरने की घटना के एक दिन बाद रविवार को पुलिस ने झूला संचालक और उसके एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया।
फरीदाबाद, भाषा। हरियाणा में फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला मैदान में एक विशाल झूले ‘सुनामी’ के टूटकर गिरने की घटना के एक दिन बाद रविवार को पुलिस ने झूला संचालक और उसके एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया।शनिवार शाम को हुए इस हादसे में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस निरीक्षक की मौत हो गई थी और 12 अन्य घायल हो गये थे।यह हादसा सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले के दौरान हुआ। घटना के समय लगभग 19 लोग झूले पर सवार थे जो अचानक हवा में झुक गया और फिर टूटकर जमीन पर गिर पड़ा।
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1989 में हरियाणा सशस्त्र पुलिस में भर्ती हुए निरीक्षक जगदीश प्रसाद 36 वर्षों की सेवा पूरी कर मार्च में सेवानिवृत्त होने वाले थे और उन्होंने झूले में फंसे लोगों को बचाने का साहसिक प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद रविवार को शव परिवार को सौंप दिया गया।
फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता यशपाल ने कहा, ‘‘घटना की जांच के लिए गठित एक विशेष जांच दल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इन आरोपियों में से एक हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का निवासी मोहम्मद शाकिर है, जो झूले का संचालन करने वाली ‘हिमाचल फन केयर’ कंपनी का मालिक है और दूसरा आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाला नितेश है,
जो शाकिर के अधीन काम करता था।यशपाल ने बताया कि हादसे में महिला एएसआई नीलम, महिला कांस्टेबल शर्मिला, एसपीओ राजेश, हर्ष प्रकाश, प्रशांत, अमीषा, परविंदर, सुनील, शिवानी, बलबीर, अनुज और पूजा समेत कुल 12 लोग घायल हो गये। उन्होंने बताया कि उनमें से पांच को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को संबंधित अधिकारियों को मेले और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।सैनी ने कहा, ‘‘इस कठिन समय में सरकार 58 वर्षीय जगदीश प्रसाद के परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को राज्य सरकार की ओर से एक-एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी।’’
इस बीच, जिला प्रशासन ने कहा है कि मेला रविवार को भी जारी रहेगा, और आगे की जांच होने तक झूले वाले क्षेत्र को सील कर दिया गया है।हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने शनिवार रात को बहादुर निरीक्षक के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।
अधिकारी ने प्रसाद को शहीद का दर्जा देते हुए दूसरों की जान बचाने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अधिकारी की सराहना की।रविवार को डीजीपी सिंघल और फरीदाबाद के आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता ने प्रसाद के परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की।पुलिस ने बताया कि वे घायलों के बारे में जानकारी लेने के लिए अस्पताल भी गये।
डीजीपी ने कहा, ‘‘निरीक्षक जगदीश प्रसाद ने ड्यूटी के दौरान घायलों को बचाने का सराहनीय प्रयास किया। उनकी मृत्यु पुलिस विभाग के लिए एक गहरी त्रासदी है।उन्होंने कहा, ‘‘विभाग परिवार को यथासंभव वित्तीय सहायता प्रदान करेगा और अनुकंपा अवकाश नीति के तहत पात्र सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।पर्यटन निदेशक पार्थ गुप्ता और फरीदाबाद के उपायुक्त आयुष सिन्हा ने रविवार को सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मेला मैदान का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना मेला मैदान में एक गेट गिरने के ठीक एक घंटे बाद हुई, जिसमें एक बच्चे समेत दो लोग घायल हो गए थे।इससे पहले पुलिस ने बताया था कि मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसआईटी का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त (अपराध) मुकेश कुमार कर रहे हैं, जबकि सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) वरुण दहिया और सूरजकुंड थाने के उपनिरीक्षक संजय कुमार इसके सदस्य हैं।
एसआईटी को घटना की विस्तृत जांच करने, संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा मानकों के पालन का आकलन करने का दायित्व सौंपा गया है।सहायक उपनिरीक्षक सन्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, वह घटना के समय निरीक्षक प्रसाद के साथ मेला परिसर में मौजूद थे।शिकायत में कहा गया कि कई लोग ‘सुनामी’ झूले पर झूल रहे थे और उसी दौरान झूला अचानक टूट गया।
इसमें कहा गया कि प्रसाद फंसे लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे थे कि तभी झूला एक ओर से पूरी तरह टूटकर प्रसाद के ऊपर गिर गया।प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।शिकायत में कहा गया, ‘‘निरीक्षक की मौत ‘हिमाचल फन केयर’ के मालिक मोहम्मद शाकिर और उसके कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन न किए जाने व लोगों की जान को जानबूझकर खतरे में डालने के कारण हुई।”
जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त-सह-मेला प्रशासक सतबीर सिंह कर रहे हैं।इस समिति के सदस्यों में डीसीपी मकसूद अहमद, वाईएमसीए यूनिवर्सिटी के यांत्रिक विभाग के विभागाध्यक्ष अरविंद गुप्ता, कार्यकारी अभियंता (यांत्रिक) हितेश कुमार और कार्यकारी अभियंता (विद्युत) अश्विनी गौर शामिल हैं।
इसी बीच, रविवार को मेले का नौवां दिन शुरू हुआ और माहौल गमगीन था, क्योंकि लोग प्रसाद और घायल व्यक्तियों के लिए प्रार्थना कर रहे थे।अधिकारियों ने एक बयान में कहा, ‘‘हाल में इस हादसे के मद्देनजर, एहतियात के तौर पर आगे की जांच होने तक झूले वाले क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है और सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की जा रही है।
महोत्सव परिसर के भीतर होने वाले अन्य सभी सांस्कृतिक, शिल्प, भोजन और मनोरंजन कार्यक्रम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और सुचारू रूप से जारी हैं।’’इसमें कहा गया है कि पर्यटकों और आम जनता की सुरक्षा प्रशासन और मेले के प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है।प्रसाद के अचानक निधन से मथुरा जिले के उनके पैतृक गांव डेंगरा में लोगों को गहरा सदमा लगा।प्रसाद के एक भाई प्रदीप शिक्षक हैं और अपने पिता सूरजमल और माता शांति देवी के साथ गांव में रहते हैं।
उनके दूसरे भाई सतीश चंद्र बल्लभगढ़ की एक रसायन फैक्टरी में काम करते हैं जबकि चंद्रभान सिंह फरीदाबाद की एक मोटर कंपनी में कार्यरत हैं।प्रदीप ने बताया, “हमें शनिवार रात आठ जे यह खबर मिली। उनकी (प्रसाद की) पत्नी सुधा अपनी दो बेटियों निधि व दीप्ति और बेटे गौरव के साथ सोनीपत पुलिस लाइंस के सरकारी आवास में रहती हैं। मेरे भाई को 2019-20 में राज्यपाल द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।”सूरजकुंड मेले में झूले से जुड़ी यह तीसरी ऐसी दुर्घटना थी, जिससे आयोजकों के सुरक्षा दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
वर्ष 2002 में एक मौत और 2019 में एक व्यक्ति के घायल होने के बावजूद शनिवार को एक अन्य हादसा हुआ।वर्ष 2002 में सूरजकुंड मेले में एक युवक की झूले पर झूलते हुए मौत हो गई थी।उस समय झूलों को कुछ वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था।वर्ष 2019 में एक दुर्घटना में एक युवक घायल हो गया, जिसके बाद झूलों को फिर से बंद कर दिया गया लेकिन उनसे होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया।अधिकारियों के अनुसार, झूले लगाने के लिए सख्त नियम लागू हैं, जिसके लिए प्रतिदिन निरीक्षण करना आवश्यक है।

