राम-भरत मिलन का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रोता, पंडाल में बहे आंसू
टूंडला क्षेत्र के गांव बसई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीराम और भरत मिलन का भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो, फिरोजाबाद। संत विष्णु चेतन महाराज ने भाई-भाई के प्रेम, परिवार के महत्व और रिश्तों की मर्यादा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस घर में प्रेम होता है वही घर वास्तव में स्वर्ग बन जाता है।गांव बसई में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा पंडाल भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो गया। कथा व्यास संत विष्णु चेतन महाराज ने जब भगवान श्रीराम और भरत के मिलन का करुणामयी प्रसंग सुनाया, तो पंडाल में बैठे श्रद्धालु अपनी भावनाओं को रोक नहीं सके और कई श्रोताओं की आंखों से आंसू छलक पड़े।
संत विष्णु चेतन महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जीवन में भाई से बड़ा सहारा दूसरा कोई नहीं होता। बड़ा भाई पिता के समान होता है और उसकी डांट-फटकार में भी छोटे भाई का कल्याण छिपा रहता है। इसलिए भाई-भाई के बीच कभी वैर नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला और वे अयोध्या से वन चले गए, तब भरतजी अयोध्यावासियों के साथ उन्हें वापस लाने के लिए वन पहुंचे।
महाराज ने कहा कि जब श्रीराम ने पिता के वचन को निभाने का संकल्प बताते हुए अयोध्या लौटने से इनकार किया, तब भरतजी उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौट आए और उन्हीं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं तपस्वी जीवन व्यतीत किया। ऐसा त्याग, प्रेम और मर्यादा ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
कथा व्यास ने कहा कि जिस घर में प्रेम, सम्मान और अपनापन होता है, वही घर स्वर्ग के समान बन जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में धन से अधिक महत्व रिश्तों और प्रेम का है। जिस घर में धन नहीं है लेकिन प्रेम है, वह व्यक्ति भी सबसे सुखी होता है, क्योंकि प्रेम को कभी भी पैसों से नहीं खरीदा जा सकता।
कथा के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का रसपान करते रहे। इस अवसर पर कथा के परीक्षत लाल सिंह, महावीर देवी, यज्ञपति नेत्रपाल, फूलवती, बच्चू सिंह, हरदेवी, रामपाल, भीमा, भोला, अजय प्रियांशु, देवेंद्र बैनीवाल, बृजेश उपाध्याय, शिव सिंह चक, अमित चौधरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

